देशभर में आज ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े ड्राइवरों ने छह घंटे की हड़ताल कर सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है। इस हड़ताल का नेतृत्व तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और अन्य राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा किया जा रहा है। यूनियनों का कहना है कि मौजूदा सिस्टम में ड्राइवरों का शोषण लगातार बढ़ता जा रहा है।
यूनियन के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या यह है कि ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट सेवाओं के लिए अभी तक कोई न्यूनतम बेस किराया तय नहीं किया गया है। इसकी वजह से कंपनियां अपने फायदे के हिसाब से किराया तय करती हैं, जिसका सीधा असर ड्राइवरों की कमाई पर पड़ता है। कई ड्राइवरों का कहना है कि ईंधन, मेंटेनेंस और कमीशन काटने के बाद उनकी आमदनी बेहद कम रह जाती है।
ड्राइवर संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि कमर्शियल पैसेंजर और गुड्स ट्रांसपोर्ट के लिए प्राइवेट, नॉन-कमर्शियल गाड़ियों का इस्तेमाल खुलेआम किया जा रहा है। इससे लाइसेंसधारी ड्राइवरों के सामने अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही है और उनकी रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है।
यूनियन की दो प्रमुख मांगें हैं। पहली, ऑटो, कैब, बाइक टैक्सी और अन्य ऐप-बेस्ड सेवाओं के लिए न्यूनतम बेस किराया तुरंत नोटिफाई किया जाए, जिसे ड्राइवर यूनियनों से सलाह लेकर तय किया जाए। दूसरी, कमर्शियल राइड के लिए प्राइवेट गाड़ियों के गलत इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई की जाए।
ड्राइवरों का कहना है कि मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 के बावजूद नियमों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया जा रहा। इसी वजह से उन्हें हड़ताल जैसा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है। आने वाले दिनों में अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।