राष्ट्रपति शासन के बाद मणिपुर में नई सरकार

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मणिपुर में राजनीतिक अस्थिरता के दौर के बाद अब एक नई शुरुआत होती दिख रही है। राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के तुरंत बाद NDA ने राज्य में अपनी सरकार बना ली है। युमनाम खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री बनाकर नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वहीं सामाजिक संतुलन साधने के लिए दो उपमुख्यमंत्री नियुक्त किए गए हैं।

शपथ ग्रहण से पहले युमनाम खेमचंद ने NDA विधायक दल के साथ राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। इस प्रतिनिधिमंडल में कुकी बहुल इलाकों चुराचांदपुर और फेरजॉल के विधायक भी शामिल थे, जिसे राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि नई सरकार सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की कोशिश करेगी।

मंगलवार को नई दिल्ली में पहले बीजेपी विधायक दल और फिर NDA विधायक दल की बैठक हुई थी, जिसमें युमनाम खेमचंद को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। इसके बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हुई और बुधवार को शपथ ग्रहण संपन्न हुआ।

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बीजेपी ने इस मौके को “मणिपुर के लिए नए अध्याय की शुरुआत” बताया है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राज्य को अब स्थिर नेतृत्व मिला है। इस कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, संबित पात्रा, मणिपुर बीजेपी अध्यक्ष शारदा देवी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दो उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर की गई है। एक ओर कुकी समुदाय, तो दूसरी ओर नागा समुदाय को प्रतिनिधित्व देकर NDA ने संदेश देने की कोशिश की है कि सरकार सभी वर्गों के हितों का ख्याल रखेगी।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई सरकार मणिपुर में शांति, विकास और भरोसे का माहौल कितनी जल्दी कायम कर पाती है। युमनाम खेमचंद के सामने प्रशासनिक चुनौतियों के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

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