इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 क्यों है भारत के टेक भविष्य की चाबी

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आम बजट 2026 में सरकार ने यह साफ कर दिया है कि भारत का भविष्य टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग के दम पर आगे बढ़ेगा। इसी रणनीति के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का एलान किया है, जिसे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।

ISM 2.0 के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे घरेलू उत्पादन को तेज गति मिलेगी।

क्यों सेमीकंडक्टर बना सबसे अहम सेक्टर

डिजिटल इंडिया, एआई, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर—इन सभी की नींव सेमीकंडक्टर पर टिकी है। बीते वर्षों में वैश्विक चिप संकट ने दिखा दिया कि सप्लाई चेन पर निर्भरता किसी भी देश के लिए जोखिम भरी हो सकती है।

भारत अभी भी सेमीकंडक्टर चिप्स के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। ISM 2.0 इसी कमजोरी को ताकत में बदलने की कोशिश है।

ग्लोबल लीडर बनने की तैयारी

सरकार का लक्ष्य है कि भारत सेमीकंडक्टर डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन में मजबूत बने। इससे भारत वैश्विक टेक्नोलॉजी मैप पर अपनी अलग पहचान बना सकेगा और निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनेगा।

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रोजगार और इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा

ISM 2.0 से न केवल बड़े उद्योगों को फायदा होगा, बल्कि स्टार्टअप्स, रिसर्च संस्थानों और युवाओं के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे। इससे लाखों हाई-स्किल जॉब्स बनने की संभावना जताई जा रही है।

भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ेगी

रक्षा और संचार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती देगी। यही वजह है कि सरकार सेमीकंडक्टर को भविष्य का रणनीतिक हथियार मान रही है।

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