मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। इसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान है, जहां सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी कर दी है। पाकिस्तान सरकार ने प्रति लीटर 55 पाकिस्तानी रुपये की वृद्धि की घोषणा की है, जिसके बाद देश में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
नई दरों के अनुसार पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत अब 321.17 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि हाई-स्पीड डीजल की कीमत बढ़कर 335.86 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी शुक्रवार आधी रात से लागू कर दी गई। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण यह फैसला लेना पड़ा।
उप-प्रधानमंत्री इसहाक डार ने पहले ही संकेत दिया था कि वैश्विक तेल कीमतों में 50 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकट का असर कई देशों पर पड़ रहा है और पाकिस्तान भी इससे अछूता नहीं है। हालांकि सरकार ने दावा किया है कि उसने उपभोक्ताओं पर न्यूनतम बोझ डालने की कोशिश की है।
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की तेल आपूर्ति काफी हद तक होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है और मौजूदा हालात के कारण इस मार्ग पर जोखिम बढ़ गया है।
मंत्री ने बताया कि पाकिस्तान के दो तेल टैंकर वैकल्पिक समुद्री मार्गों से देश की ओर आ रहे हैं ताकि आपूर्ति प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों की जमाखोरी को लेकर सख्त रुख अपनाएगी और कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने जनता को भरोसा दिलाया है कि देश में तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्थिति में सुधार होगा और कच्चे तेल की कीमतें कम होंगी, सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी राहत देने की कोशिश करेगी।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो इसका असर आम लोगों की जेब पर और अधिक पड़ सकता है। इसलिए आने वाले समय में सरकार के फैसले पर सबकी नजर बनी रहेगी।