- Congress Crisis: राहुल गांधी पर पूर्व नेता के आरोपों से सियासत में बढ़ी हलचल
नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शकील अहमद के एक बयान ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के दौरान वे शशि थरूर को वोट देना चाहते थे, लेकिन दबाव के चलते मल्लिकार्जुन खरगे को वोट देना पड़ा।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी का उदाहरण बताया है।
शकील अहमद ने क्या कहा?
एक इंटरव्यू में शकील अहमद ने कहा कि कांग्रेस में फैसले स्वतंत्र रूप से नहीं लिए जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में परिवारवाद और दबाव की राजनीति हावी है।
उन्होंने कहा,
“मैं शशि थरूर को वोट देना चाहता था, लेकिन जब देखा कि राहुल और सोनिया गांधी के करीबी लोग खरगे जी के लिए वोट मांग रहे हैं, तो मैंने अपनी मर्ज़ी के खिलाफ उन्हें वोट दिया।”
उन्होंने यह भी कहा कि वे पिछले कई वर्षों से राहुल गांधी से निराश हैं और उनसे मिलने की कोशिश भी नहीं की।
राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप
शकील अहमद ने राहुल गांधी पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकप्रिय और मजबूत नेताओं से दूरी बनाकर रखते हैं क्योंकि उन्हें उनसे राजनीतिक खतरा महसूस होता है।
उनके अनुसार:
राहुल गांधी वरिष्ठ नेताओं की सलाह नहीं मानते
पार्टी में केवल चुनिंदा लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है
आंतरिक लोकतंत्र कमजोर हो चुका है
कांग्रेस को परिवार की निजी संपत्ति समझा जा रहा है
उन्होंने 2019 में अमेठी से राहुल गांधी की हार का भी जिक्र करते हुए इसे उनके व्यवहार का नतीजा बताया।
शशि थरूर की प्रतिक्रिया
जब मीडिया ने शशि थरूर से इस मुद्दे पर सवाल किया तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
थरूर ने कहा,
“मैं हर बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकता। अगर शकील अहमद ने कुछ कहा है तो उनसे ही पूछा जाए।”
उनके इस जवाब को राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
शकील अहमद के बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कहा कि यह बयान कांग्रेस की अंदरूनी सच्चाई को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी उन नेताओं को किनारे कर देते हैं जो स्वतंत्र सोच रखते हैं या पार्टी के हित में सवाल उठाते हैं।
बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस अपनी चुनावी हार के लिए जिम्मेदारी लेने के बजाय चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर बचने की कोशिश करती है।
कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शकील अहमद का बयान कांग्रेस के भीतर बढ़ती असंतुष्टि को दर्शाता है। लगातार कई वरिष्ठ नेता पार्टी नेतृत्व और फैसलों पर सवाल उठा चुके हैं।
इस तरह के बयान आने वाले चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकते हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी को जल्द ही इस विवाद पर सफाई देनी पड़ सकती है।
यह मामला न केवल कांग्रेस की आंतरिक स्थिति को उजागर करता है, बल्कि विपक्ष को भी हमले का नया मुद्दा देता है।