उत्तर प्रदेश में लागू गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम एक बार फिर चर्चा में है। मुरादाबाद जिले में पांच मुस्लिम छात्राओं के खिलाफ इस कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने अपनी एक सहपाठी पर धार्मिक पहचान बदलने का दबाव बनाया। हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि मामला अभी जांच के चरण में है।
बिलारी थाना पुलिस के मुताबिक, शिकायत पीड़िता के भाई द्वारा दर्ज कराई गई थी। शिकायत में कहा गया कि ट्यूशन क्लास के दौरान कथित रूप से छात्रा पर बुर्का पहनने और इस्लाम अपनाने के लिए मानसिक दबाव बनाया गया। पुलिस ने इस आधार पर संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू यह कानून जबरन या छलपूर्वक धर्म परिवर्तन को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। कानून के तहत यदि किसी व्यक्ति को दबाव, प्रलोभन या धोखे से धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाता है। दोष साबित होने पर लंबी सजा का प्रावधान है।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं। ट्यूशन क्लास से जुड़े अन्य छात्रों, शिक्षकों और परिजनों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी।
इस मामले के बीच, समाजवादी पार्टी नेता एसटी हसन का बयान भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। उन्होंने दिल्ली में एक मस्जिद के पास हुए अतिक्रमण हटाने के अभियान को लेकर प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी कार्रवाइयों में संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।
एसटी हसन ने कहा कि यदि किसी स्थान पर अवैध निर्माण है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इससे जुड़ी हिंसा और भावनात्मक नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
दिल्ली पुलिस ने हालांकि स्पष्ट किया कि कार्रवाई अदालत के आदेशों के अनुसार की गई और शांति बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए थे।
फिलहाल मुरादाबाद का मामला जांच के अधीन है और प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।