प्रयागराज के केशवपुर कुसुआ गांव में बुधवार का दिन कभी न भूलने वाला बन गया। गांव के तालाब में डूबने से चार बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। जिस तालाब के किनारे बच्चे रोज खेलते थे, वही तालाब उनकी जिंदगी का अंत बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के समय गांव के कुछ बच्चे तालाब के पास खेल रहे थे। गर्मी और खेल की मस्ती में वे कब तालाब के अंदर चले गए, किसी को भनक तक नहीं लगी। बताया जाता है कि तालाब के एक हिस्से में अचानक गहराई बढ़ जाती है, जिससे बच्चों का संतुलन बिगड़ गया और वे बाहर नहीं निकल सके।
काफी देर तक बच्चों के घर न लौटने पर परिजनों को चिंता हुई। गांव में तलाश शुरू हुई तो तालाब के किनारे कपड़े और चप्पलें पड़ी मिलीं। इसके बाद गांव में चीख-पुकार मच गई। लोगों ने तालाब में उतरकर खोजबीन की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
तालाब से चारों बच्चों के शव निकलते ही गांव में मातम छा गया। मृतकों में 10 से 19 वर्ष की उम्र के बच्चे शामिल हैं। इनमें दो सगे भाई भी थे। एक ही परिवार के चार बच्चों की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला दुर्घटना का लग रहा है, लेकिन परिजनों की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।
परिजनों का कहना है कि बच्चों की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं हो सकती। उनका आरोप है कि घटना के पीछे कुछ और कारण भी हो सकते हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। गांव के लोगों का भी कहना है कि तालाब के पास कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं था और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में तालाबों और जलस्रोतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि अगर समय रहते तालाब के चारों ओर घेराबंदी होती, तो शायद ये चार जिंदगियां बच सकती थीं।
फिलहाल केशवपुर कुसुआ गांव में हर तरफ सन्नाटा है। घर-घर मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है। चार मासूमों की असमय मौत ने पूरे गांव को गहरे दुख में डुबो दिया है।