ईरान में जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार का रुख और अधिक कठोर होता नजर आ रहा है। ईरान के मुख्य न्यायाधीश गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने संकेत दिए हैं कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के मामलों में तेजी से सुनवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों को फांसी जैसी सख्त सजा दी जा सकती है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों में गहरी चिंता पैदा हो गई है।
सरकारी टेलीविजन द्वारा साझा किए गए एक वीडियो संदेश में न्यायपालिका प्रमुख ने साफ तौर पर कहा कि किसी भी कार्रवाई का असर तभी होता है, जब उसे बिना देरी के अंजाम दिया जाए। उन्होंने यह भी इशारा किया कि लंबी कानूनी प्रक्रिया सरकार के लिए प्रभावी नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आधिकारिक तैयारी का संकेत है।
जल्द फैसले पर जोर
मोहसेनी-एजेई ने अपने बयान में कहा कि अगर कोई फैसला लेना है, तो उसे तुरंत लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, अगर किसी सजा को महीनों तक टाल दिया जाए, तो उसका मनोवैज्ञानिक और सामाजिक असर कमजोर पड़ जाता है। इस बयान को सरकार की “जीरो टॉलरेंस नीति” के तौर पर देखा जा रहा है।
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब ईरान में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। एक्टिविस्ट समूहों का दावा है कि हजारों लोग हिरासत में हैं और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिल रहा।
हिंसक कार्रवाई पर सवाल
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई में अब तक 2,500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह संख्या ईरान के हालिया इतिहास में किसी भी आंदोलन के दौरान हुई मौतों से कहीं अधिक बताई जा रही है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कई मौतें सीधे सुरक्षा बलों की गोलीबारी से हुई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार जारी रहा, तो अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है। हालांकि ईरान ने इन चेतावनियों को आंतरिक मामलों में दखल बताया है।
आम जनता में डर का माहौल
ईरान के कई शहरों में हालात सामान्य दिखने के बावजूद आम लोग डर के साये में जी रहे हैं। तेहरान की एक महिला ने कहा कि गोली चलने की आवाजें और हिंसा की खबरें सुनकर लोग सहमे हुए हैं। स्कूल बंद हैं और माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
“प्रदर्शन को युद्ध बना दिया गया”
36 वर्षीय अहमदरेजा तवाकोली ने बताया कि उन्होंने खुद एक प्रदर्शन को हिंसा में बदलते देखा। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारी निहत्थे थे और केवल अपनी बात रखने आए थे। उन्होंने कहा कि हथियारों का इस्तेमाल केवल सुरक्षा बलों द्वारा किया गया, जिससे हालात बेकाबू हो गए।
ईरान में बढ़ता तनाव न केवल देश के भीतर बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में न्यायपालिका के फैसले यह तय करेंगे कि हालात और बिगड़ेंगे या समाधान की ओर बढ़ेंगे।