ईरान में नए साल की शुरुआत उथल-पुथल और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के साथ हुई है। बीते चार दिनों से जारी सरकार विरोधी आंदोलन सोमवार को और उग्र हो गया, जब राजधानी तेहरान समेत देश के कई बड़े शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं, हालांकि आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
तेहरान के अलावा इस्फ़हान, यज़्द, ज़ंजन, कोहदस्त और फ़ासा जैसे शहरों में भी भारी संख्या में लोग प्रदर्शन करते नजर आए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने में पूरी तरह नाकाम रही है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।
कई इलाकों में हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी भी हुई। कोहदस्त शहर में हालात सबसे ज्यादा तनावपूर्ण रहे, जहां उग्र भीड़ ने पुलिस बल पर हमला कर दिया। इस घटना में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक जवान घायल बताए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, कमजोर नीतियों और भ्रष्टाचार की वजह से चरमराई हुई है। युवाओं में बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है, जिससे सरकार के प्रति असंतोष लगातार बढ़ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि राजनीतिक विश्लेषक इसे सरकार के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द काबू में नहीं आए, तो ईरान में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है। फिलहाल देश के कई हिस्सों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और इंटरनेट सेवाओं पर भी आंशिक रोक लगाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।