देश में तंबाकू उत्पादों के उपभोक्ताओं को 1 फरवरी 2026 से बड़ा झटका लगने वाला है। केंद्र सरकार ने सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर नया टैक्स सिस्टम लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत सिगरेट पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगाई जाएगी। इस फैसले के बाद सिगरेट की कीमतों में प्रति स्टिक 2.05 रुपये से लेकर 8.50 रुपये तक की बढ़ोतरी होगी। नए नियम खासतौर पर लंबी और प्रीमियम सिगरेट को महंगा बना देंगे।
वित्त मंत्रालय ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन को अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1000 सिगरेट पर 2050 रुपये से लेकर 8500 रुपये तक की एक्साइज ड्यूटी तय की गई है। यह टैक्स मौजूदा 40 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त होगा, यानी उपभोक्ताओं पर टैक्स का बोझ और बढ़ जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। तंबाकू उत्पादों की खपत को कम करने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी को एक प्रभावी कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही मंत्रालय ने स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम को भी अधिसूचित किया है, जिसके तहत पान मसाला कारोबार की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी के आधार पर सेस लगाया जाएगा।
नए टैक्स स्ट्रक्चर के तहत तंबाकू उत्पादों पर लागू मौजूदा 28 प्रतिशत जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर की व्यवस्था को बदला जाएगा। हालांकि, पान मसाला पर 40 प्रतिशत जीएसटी को ध्यान में रखते हुए कुल टैक्स लोड को 88 प्रतिशत पर बनाए रखा गया है। सरकार का उद्देश्य राजस्व संग्रह के साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को कम करना भी है।
अगर सिगरेट की श्रेणियों की बात करें तो नई व्यवस्था में अलग-अलग लंबाई की सिगरेट पर अलग टैक्स तय किया गया है। 65 मिलीमीटर तक की छोटी नॉन-फिल्टर सिगरेट पर प्रति स्टिक लगभग 2.05 रुपये का अतिरिक्त टैक्स लगेगा, जबकि इसी लंबाई की फिल्टर सिगरेट पर करीब 2.10 रुपये प्रति स्टिक की बढ़ोतरी होगी।
65 से 70 मिलीमीटर लंबाई वाली सिगरेट पर प्रति स्टिक 3.60 रुपये से 4.00 रुपये तक अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगेगी। वहीं, 70 से 75 मिलीमीटर की प्रीमियम सिगरेट पर करीब 5.40 रुपये प्रति स्टिक टैक्स बढ़ेगा। इसके अलावा ‘अन्य’ श्रेणी में आने वाली गैर-मानक या विशेष डिजाइन वाली सिगरेट पर सबसे ज्यादा 8.50 रुपये प्रति स्टिक टैक्स लगाया जाएगा, हालांकि बाजार के ज्यादातर लोकप्रिय ब्रांड इस श्रेणी में शामिल नहीं हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सिगरेट की खपत पर असर पड़ेगा और सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। वहीं, तंबाकू उद्योग से जुड़े कारोबारियों को आने वाले समय में कीमतों और बिक्री को लेकर नई रणनीति बनानी पड़ सकती है।