बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सरकारी आवासों को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड वाले सरकारी आवास को देर रात खाली किए जाने पर बीजेपी ने राष्ट्रीय जनता दल पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। जानकारी के मुताबिक, भवन निर्माण विभाग ने 25 नवंबर को राबड़ी देवी को आवास खाली करने का नोटिस जारी किया था। नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद बुधवार देर रात बंगले से सामान हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान पौधे, फूलों के गमले और गार्डन का अन्य सामान छोटी गाड़ियों में भरकर गोला रोड स्थित एक गौशाला में भेजा गया।
रात में अचानक हुई इस शिफ्टिंग ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह रही कि इस दौरान लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव पटना में मौजूद नहीं थे। वहीं, आरजेडी की ओर से अब तक इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए कहा कि अगर आवास खाली करने की प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक थी, तो उसे दिन के उजाले में क्यों नहीं अंजाम दिया गया। बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि रात में चोरी-छिपे सामान निकालना जनता के मन में संदेह पैदा करता है।
नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि लालू परिवार पिछले करीब 20 वर्षों से इस सरकारी आवास में रह रहा था और इस दौरान सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हुआ। उन्होंने कहा कि जनता के सामने जवाब देने से बचने के लिए ही रात का समय चुना गया।
बीजेपी प्रवक्ता ने व्यंग्य करते हुए कहा कि “दिन में कैमरे और सवालों का सामना करना मुश्किल होता, इसलिए रात में सब कुछ समेटा गया।” उन्होंने यहां तक कह दिया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई कीमती सामान या “खजाना” चुपचाप बाहर निकाला गया हो। अपने बयान के अंत में नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा, “सरकारी बंगले से निकलते वक्त ध्यान रखिएगा, टोंटी खोलकर नहीं ले जाइएगा।” इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चा और तेज हो गई है।