लखनऊ: बिहार में एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब हटवाने के विवाद ने सियासी तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि महिला अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला भी है।
मायावती ने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण जैसे सम्मानजनक कार्यक्रम में इस तरह की घटना का होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया, तो इसे तुरंत समाप्त क्यों नहीं किया गया। बसपा प्रमुख के अनुसार, मंत्रियों की गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों ने विवाद को और गहरा कर दिया है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस प्रकरण में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पश्चाताप करना चाहिए और यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि किसी भी महिला के सम्मान और आस्था से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारती सिंह बनीं दूसरी बार बेटे की मां https://sindhutimes.in/?p=21599
बहराइच परेड विवाद पर भी जताई नाराजगी
बसपा सुप्रीमो ने उत्तर प्रदेश के बहराइच में पुलिस परेड के दौरान कथावाचक को सलामी दिए जाने के मामले को भी अनुचित करार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था की एक सख्त मर्यादा होती है और परेड जैसी औपचारिक प्रक्रिया में परंपराओं से खिलवाड़ अनुशासनहीनता को बढ़ावा देता है। उन्होंने डीजीपी से इस मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की।
विधानसभा और संसद सत्र पर उठाए सवाल
मायावती ने यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र को भी जनता के मुद्दों से भटका हुआ बताया। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार इस पर जवाब देने से बच रही है। इसके अलावा संसद के शीतकालीन सत्र में वायु प्रदूषण जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा न होना भी बेहद निराशाजनक है।
उन्होंने बांग्लादेश में बढ़ती भारत विरोधी गतिविधियों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार से ठोस और दूरगामी नीति बनाने की अपील की। मायावती ने कहा कि देश की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों पर राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाना बेहद जरूरी है।