दुबई/तेहरान: ईरान में मानवाधिकारों की आवाज़ मानी जाने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब वे मशहद शहर में एक मानवाधिकार वकील की स्मृति सभा में शामिल होने पहुंची थीं। इस कदम के बाद देश-विदेश में ईरान सरकार की कड़ी आलोचना शुरू हो गई है। नरगिस मोहम्मदी से जुड़ी संस्था ने बताया कि उन्हें राजधानी तेहरान से करीब 680 किलोमीटर दूर मशहद में सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन वकील खोसरो अलीकुर्दी की याद में किया गया था, जिनकी हाल ही में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। हालांकि स्थानीय अधिकारियों ने उनकी मौत को दिल का दौरा बताया, लेकिन इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती बढ़ गई।
ईरानी अधिकारियों ने मोहम्मदी की गिरफ्तारी की पुष्टि तो की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें तुरंत जेल भेजा जाएगा या नहीं। गौरतलब है कि 53 वर्षीय नरगिस दिसंबर 2024 से चिकित्सीय कारणों के चलते अस्थायी रिहाई पर थीं। उनके समर्थकों को पहले से आशंका थी कि सरकार उन्हें दोबारा जेल भेज सकती है। नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने इस गिरफ्तारी पर गहरी चिंता जताते हुए ईरान से नरगिस मोहम्मदी की तुरंत और बिना शर्त रिहाई की मांग की है। वहीं, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। नरगिस मोहम्मदी का संघर्ष लंबा और कठिन रहा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुकीं मोहम्मदी अब तक 13 बार जेल जा चुकी हैं, उन्हें 5 बार दोषी ठहराया गया है और कुल मिलाकर 30 साल से ज्यादा की सजा सुनाई जा चुकी है। राज्य सुरक्षा के खिलाफ साजिश और सरकार विरोधी प्रचार जैसे आरोपों में उन्हें 13 साल 9 महीने की सजा मिली है।
उनकी सेहत भी लगातार चिंता का विषय रही है। जेल में रहते हुए उन्हें कई बार दिल का दौरा पड़ा, 2022 में इमरजेंसी सर्जरी करानी पड़ी और हाल के महीनों में कैंसर की आशंका भी जताई गई थी। डॉक्टरों ने उन्हें लंबे समय तक जेल से दूर रखने की सलाह दी थी।