नोएडा जैसे हाई-टेक शहर में जहाँ छात्र ऑनलाइन क्लासेस लेते हैं, असाइनमेंट अपलोड करते हैं और डिजिटल दुनिया का हिस्सा बन चुके हैं, वहीं उसी तकनीकी माहौल में एक खतरनाक ई-ड्रग नेटवर्क चुपचाप पनप रहा था। यह नेटवर्क इंटरनेट के जरिए ऑर्डर लेकर सीधे कॉलेजों के पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों तक गांजा सप्लाई कर रहा था। इस चौंकाने वाले मामले का खुलासा तब हुआ जब नोएडा पुलिस को एक सीक्रेट इनपुट मिला और उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क को धर दबोचा।
ऑनलाइन चलता था गांजा कारोबार
पहले ड्रग्स केवल अंधेरी गलियों में, संदिग्ध ठिकानों पर या छिपे हुए नेटवर्क के जरिए बेची जाती थीं। लेकिन अब समय बदल चुका है। नोएडा में आरोपी अमर भरवे ने नशे के कारोबार को डिजिटल रूप देकर उसे एक ई-कॉमर्स की तरह संचालित करना शुरू कर दिया था। आरोपी ई-पोर्टल के माध्यम से गांजा बिक्री का नेटवर्क चला रहा था। छात्र ऑनलाइन ऑर्डर देते और वह पैकेट बनाकर PG और हॉस्टल तक डिलीवर करता।
छोटे-छोटे पाउच में पैक किया गया गांजा, बाइक पर डिलीवरी, और डिजिटल इनबॉक्स के जरिए बुकिंग — ये सब इस बात का संकेत है कि नशे का कारोबार अब नए रूप में बदल रहा है।
पुलिस की कार्रवाई और बड़ी बरामदगी
इसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पुलिस तक पहुँची। सेक्टर 126 थाना क्षेत्र के प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र बालियान के अनुसार, बुधवार रात उपनिरीक्षक विपिन कुमार की टीम ने जेपी विश टाउन सोसाइटी के पास से अमर भरवे को पकड़ लिया। पकड़ने के बाद जब उसकी तलाशी ली गई, तो पुलिस टीम के होश उड़ गए।
आरोपी के पास से 4.538 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया, जो पहले से तैयार छोटे-छोटे पैकेटों में भरा हुआ था। इसके अलावा, डिलीवरी में इस्तेमाल की जाने वाली एक बाइक भी जब्त की गई।
पूछताछ में खुला बड़ा नेटवर्क
अमर भरवे से पूछताछ में पता चला कि वह लंबे समय से पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को टारगेट कर गांजा सप्लाई कर रहा था। निगरानी से बचने के लिए वह अपना सारा काम ऑनलाइन माध्यम से करता था—ऑर्डर लेना, लोकेशन तय करना और डिलीवरी करना।
छात्रों तक नशा पहुँचाने का यह तरीका पुलिस के अनुसार बेहद खतरनाक है क्योंकि इसे ट्रेस करना मुश्किल होता है और यह युवा पीढ़ी को तेजी से नशे की चपेट में धकेल रहा था।
पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी सिर्फ एक आरोपी को पकड़ना नहीं है, बल्कि उसके माध्यम से ऐसे और कई ई-ड्रग नेटवर्क की तलाश की जा रही है जो तकनीक का इस्तेमाल कर युवाओं तक नशा पहुँचा रहे हैं।
पुलिस अब उसके डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और चैट हिस्ट्री खंगाल रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।