सहारनपुर। कांशीराम कॉलोनी में सोमवार शाम 6 बजे से शुरू हुआ ड्रामा रात 8 बजे तक चला। 35 साल का शुभम, शराब के नशे में लाल-पीली आंखें लिए, अपनी पत्नी शिवानी और 3 साल के बेटे को लेने ससुराल पहुंचा। पहले गिड़गिड़ाया, “बस एक बार साथ चले आओ।” ससुराल वालों ने मना किया – “शराब पीकर मारपीट करता है, कोई काम-धंधा नहीं। बेटी को नहीं जाएगी।” बस, यही बात शुभम को चुभ गई। गुस्से में वो पास की 40 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया और चिल्लाने लगा, “अगर शिवानी-बच्चा नहीं भेजोगे तो अभी कूदकर जान दे दूंगा!”
मोहल्ले में हड़कंप मच गया। बच्चे रोने लगे, औरतें चीखने लगीं। लोग फोन निकालकर वीडियो बनाने लगे। कोई बोला, “पागल हो गया है।” कोई बोला, “मारपीट करता है, अच्छा हुआ बेटी नहीं गई।” शुभम ऊपर से चिल्लाता रहा – “मैं मर जाऊंगा, सबकी जिम्मेदारी तुम्हारी!” नीचे ससुराल वाले भी डर गए।
सूचना मिलते ही कोतवाली देहात की पुलिस पहुंची। इंस्पेक्टर ने माइक थामा, “भाई नीचे आ जाओ, बात करते हैं।” शुभम नहीं माना। दारोगा जी चिल्लाए, “शिवानी को बुलाओ!” आखिरकार पुलिस ने आश्वासन दिया – “पत्नी को साथ भेज देंगे।” तब जाकर शुभम नीचे उतरा। हाथ-पैर कांप रहे थे। पुलिस ने हिदायत देकर छोड़ गई। शिवानी और बच्चा अभी मायके में ही हैं।
मोहल्ले वाले बताते हैं – शुभम पहले भी कई बार ऐसा कर चुका है। शराब पीकर मारपीट, गाली-गलौज। शिवानी ने कई बार पंचायत में शिकायत की, लेकिन बात नहीं बनी। ससुराल वाले कहते हैं, “अब डर लगता है। बेटी को नहीं भेजेंगे।”
ये ड्रामा सिर्फ एक नशेड़ी पति की जिद नहीं। ये घरेलू हिंसा, नशे और टूटते रिश्तों की कड़वी सच्चाई है। एक तरफ पति का हक, दूसरी तरफ औरत की सुरक्षा। पुलिस बीच में फंसी रही। आखिर में कोई FIR नहीं, कोई कार्रवाई नहीं। बस एक और दिन गुजर गया। लेकिन सवाल वही – ऐसी जिंदगियां कब तक डर में जिएंगी?