नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया–राहुल गांधी की बढ़ी मुश्किलें

न्यूज़ राजनीती राष्ट्रीय

नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर सुर्खियों में है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में नई FIR दर्ज की है, जिसके बाद कांग्रेस की शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर कानूनी दबाव बढ़ गया है। यह FIR ईडी द्वारा भेजी गई शिकायत के आधार पर दर्ज की गई, जिसमें पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत अनुसूचित अपराध दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। इस नई FIR में सोनिया और राहुल गांधी के अलावा छह अन्य व्यक्तियों और तीन कंपनियों के नाम शामिल किए गए हैं।

मामले में आरोप है कि कांग्रेस से जुड़ी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) पर कब्जा करने के लिए कथित तौर पर एक आपराधिक साजिश रची गई। जांच में यह भी सामने आया कि Young Indian नामक कंपनी के जरिए AJL की लगभग 2,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल किया गया। FIR में नामित व्यक्तियों में सैम पित्रोदा (इंडियन ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख), सुमन दुबे और अन्य भी शामिल हैं।

जांच में एक अहम बिंदु यह है कि कोलकाता की कथित शेल कंपनी Dotex ने Young Indian को 1 करोड़ रुपये दिए थे। इसी लेनदेन के आधार पर Young Indian ने मात्र 50 लाख रुपये के भुगतान पर AJL का अधिग्रहण कर लिया, जबकि इसकी संपत्तियों का वास्तविक मूल्य 2,000 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। यह कदम वित्तीय अनियमितताओं और साजिश के संदेह को और मजबूत करता है।

इस बीच, राउज एवेन्यू कोर्ट में ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने का फैसला भी लंबित है। शनिवार को अदालत ने निर्णय 16 दिसंबर तक के लिए टाल दिया। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने अब इस तारीख को यह तय करेंगे कि ईडी की चार्जशीट पर आधिकारिक रूप से संज्ञान लिया जाए या नहीं।

पिछली सुनवाई में ईडी ने कोर्ट से कहा था कि सभी आरोपी अपना लिखित जवाब दाखिल करें, लेकिन कुछ वकीलों ने रिकॉर्ड के बड़े आकार का हवाला देते हुए समय देने की मांग की। अदालत ने आरोपियों को नोटिस देते हुए कहा था कि संज्ञान लेने से पहले उनका पक्ष सुनना जरूरी है। कोर्ट ने BSNSS की धारा 223 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और फेयर ट्रायल की दिशा में जरूरी कदम है और पीएमएलए के प्रावधानों से टकराती नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *