लखनऊ। कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के बड़े मामले में लखनऊ एसटीएफ ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को गिरफ्तार कर लिया है। गोमतीनगर स्थित ग्वारी चौराहे के पास से एसटीएफ टीम ने उसे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद की गई पूछताछ में अमित टाटा ने कई अहम खुलासे किए, जिनसे इस अंतरराज्यीय ड्रग रैकेट की गहराई और नेटवर्क का पता चला।
अमित कुमार सिंह ने बताया कि उसका परिचय आज़मगढ़ निवासी विकास सिंह के माध्यम से वाराणसी के दवा व्यापारी शुभम जायसवाल से हुआ था। शुभम जायसवाल एबॉट कंपनी की फेन्सेडिल सिरप का झारखंड के रांची में ‘शैली ट्रेडर्स’ के नाम से बड़ा कारोबार संचालित करता है। इसी कारोबारी नेटवर्क के जरिए कोडीन सिरप को नशे के रूप में विभिन्न राज्यों में खपाने की बड़ी साजिश रची जा रही थी।
पूछताछ में सामने आया कि धनबाद में बनी ‘देवकृपा मेडिकल एजेंसी’ में अमित टाटा ने 5 लाख रुपये निवेश किए थे, जिसके बदले उसे 22 लाख रुपये का लाभ मिला। इसी लालच में उसने बनारस में ‘श्री मेडिकल’ नाम से ड्रग लाइसेंस लेकर एक फर्म भी खोली, जिसका पूरा संचालन शुभम जायसवाल और उसके साथी करते थे।
एसटीएफ के अनुसार, शुभम जायसवाल और उसके पार्टनर्स ने एबॉट कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलकर 100 करोड़ रुपये से अधिक का कोडीन युक्त कफ सिरप खरीदा था। इस सिरप की बड़ी मात्रा फर्जी बिलिंग, ई-वे बिल और डमी डॉक्यूमेंट्स के जरिए विभिन्न राज्यों में तस्करी कर बेची गई। रांची और गाजियाबाद में पुलिस कार्रवाई के बाद जब गैंग के सदस्य सौरभ त्यागी और विभोर राणा गिरफ्तार हुए, तो शुभम जायसवाल अपने परिवार और पार्टनर वरुण सिंह, गौरव जायसवाल के साथ दुबई भाग गया।
जांच में यह भी सामने आया कि गाजियाबाद और वाराणसी में बड़े गोदाम बनाकर इस कफ सिरप को यूपी से झारखंड, पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश और बिहार से नेपाल तक सप्लाई किया जा रहा था।
मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के बाद देशभर में कड़ी कार्रवाई शुरू हुई। इसी अभियान में यूपी पुलिस और एसटीएफ को इस बड़े रैकेट का सुराग मिला, जिससे कई गिरफ्तारियां हुईं और नेटवर्क का विस्तार सामने आया।