अयोध्या: राम मंदिर में आयोजित भव्य ध्वजारोहण समारोह के बाद अब राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के फैयाजाबाद सांसद अवधेश प्रसाद ने गंभीर आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम में केवल इसलिए निमंत्रण नहीं दिया गया क्योंकि वे दलित समुदाय से आते हैं। अवधेश प्रसाद ने इसे “संकीर्ण मानसिकता” का परिचय बताया और कहा कि भगवान राम सभी के हैं, इसलिए इस तरह का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।
अवधेश प्रसाद ने मीडिया से कहा,
“रामलला के दरबार में ध्वजारोहण समारोह में मुझे इसलिए नहीं बुलाया गया क्योंकि मैं दलित समुदाय से हूं। यह राम का सम्मान नहीं, बल्कि संकीर्ण सोच है। मेरी लड़ाई किसी पद या निमंत्रण के लिए नहीं, बल्कि सम्मान, समानता और संविधान के सम्मान के लिए है।”
इससे पहले मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के 191 फीट ऊँचे शिखर पर धर्म ध्वज फहराया। यह ध्वज मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का प्रतीक है। भगवा रंग के इस त्रिभुजाकार ध्वज की ऊंचाई 10 फीट और लंबाई 20 फीट है। इसमें तीन पवित्र प्रतीक—ॐ, सूर्य और कोविदारा वृक्ष—अंकित हैं, जो सनातन परंपरा के गहरे आध्यात्मिक अर्थों को दर्शाते हैं।
कोविदार वृक्ष प्राचीन वनस्पति संकरण का प्रतीक माना जाता है, सूर्य भगवान राम के सूर्यवंशी कुल का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि ॐ सनातन आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है।
PM मोदी का संबोधन
ध्वजारोहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत ही नहीं, पूरा विश्व “राममय” हो गया है। उन्होंने इसे 500 वर्षों के संघर्ष, पीड़ा और उम्मीदों की पूर्ति वाला क्षण बताया।
मोदी बोले—
“सदियों के घाव भर रहे हैं। सदियों की पीड़ा शांत हो रही है। यह उस यज्ञ की पूर्णाहुति है जिसकी अग्नि 500 वर्षों से प्रज्वलित थी।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को 2047 तक विकसित बनाने के लिए “राम के मूल्यों” को अपनाना होगा। पीएम मोदी ने समाज के सभी वर्गों—महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, कमजोर और वंचित समुदायों—को विकास के केंद्र में रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
विवाद बढ़ता दिख रहा है
ध्वजारोहण कार्यक्रम की भव्यता के बीच, सांसद अवधेश प्रसाद का बयान राजनीतिक चर्चा का नया केंद्र बन गया है। एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक क्षण बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सामाजिक असमानता और राजनीतिक भेदभाव का मामला बता रहा है।