तेजस्वी यादव के कैंपेन सॉन्ग विवाद से बिहार में बढ़ा राजनीतिक तनाव

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पटना: तेजस्वी यादव और उनके चुनाव प्रचार से जुड़ा एक गाना बिहार में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। दरअसल, RJD के चुनावी प्रचार के दौरान कलाकारों द्वारा गाया गया एक गीत विवादों में आ गया, जिसके बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। सत्ताधारी NDA नेताओं ने तेजस्वी यादव पर तीखे हमले किए और आरोप लगाया कि वह अपनी चुनावी नाकामी का दोष कलाकारों पर डाल रहे हैं।

NDA नेताओं का हमला—“छोटी सोच का उदाहरण”

बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने तेजस्वी यादव की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा,
“यह कैसी छोटी सोच है कि अपनी हार का दोष कलाकारों पर थोप रहे हैं? यह RJD और महागठबंधन की असली मानसिकता को दिखाता है।”

उन्होंने आगे कहा कि जनता का भरोसा जीतने में नाकाम रहने के बाद RJD अब भ्रम फैलाकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। मंत्री के अनुसार, यह बयानबाजी उनकी हताशा को दर्शाती है।

BJP MLA मिथिलेश तिवारी का पलटवार

बैकुंठपुर के BJP विधायक मिथिलेश तिवारी ने भी कलाकारों का समर्थन किया और तेजस्वी यादव पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा,
“कलाकारों ने सिर्फ वही गाया जो उन्हें दिया गया था, उनकी क्या गलती है?”

उन्होंने आगे कहा कि बिहार की जनता ने तेजस्वी यादव के नए अवतार को नकार दिया है और अब RJD इसका ठीकरा दूसरों पर फोड़ रही है।

तिवारी यहीं नहीं रुके, उन्होंने तेजस्वी यादव को सलाह देते हुए कहा,
“पहले हाई स्कूल में एडमिशन लें, मैट्रिक पास करें, फिर रामकृपाल यादव की बायोग्राफी पढ़ें।”

तिवारी के अनुसार, रामकृपाल यादव अच्छे शासन की मिसाल हैं जबकि तेजस्वी यादव “गलत नेतृत्व” का उदाहरण बनते जा रहे हैं।

RJD में टूट की बात भी उठी

BJP MLA ने दावा किया कि RJD अंदरूनी तौर पर टूट चुकी है। उन्होंने कहा कि
बहनें रोते हुए घर छोड़ चुकी हैं, भाई पार्टी से अलग हो रहे हैं और अब कलाकारों पर इल्ज़ाम लगाया जा रहा है।
तिवारी का कहना है कि जिला अध्यक्षों से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक में असंतोष है और कई लोग पार्टी छोड़ रहे हैं।

विवाद ने पकड़ा राजनीतिक मोड़

एक साधारण कैंपेन गीत को लेकर शुरू हुआ मुद्दा अब बड़े राजनीतिक विवाद में बदल चुका है।
जहाँ RJD इसे राजनीतिक साज़िश बता रही है, वहीं NDA नेताओं का दावा है कि यह तेजस्वी यादव की नेतृत्व क्षमता की पूरी तरह से असफलता का परिणाम है।

यह विवाद आने वाले चुनावी माहौल में नया रंग भर रहा है और दोनों पक्ष इसे अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

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