बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और महागठबंधन के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी अब आत्ममंथन मोड में है। 14 नवंबर को आए चुनाव परिणामों के बाद शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, अजय माकन और बिहार के पार्टी प्रभारी कृष्णा अल्लावरु सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार में मिली करारी हार के कारणों की समीक्षा करना और आगे की रणनीति तय करना था।
कांग्रेस ने इस चुनाव में 61 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन परिणाम बेहद निराशाजनक रहे और पार्टी केवल 6 सीटें ही जीत सकी। यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान ने इसे गंभीरता से लिया है। बैठक के दौरान बिहार चुनावों में आए नतीजों को लेकर कई सवाल उठाए गए। पार्टी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया, वोटिंग पैटर्न और मतगणना को लेकर गहन चर्चा की।
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बैठक के बाद कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि ‘‘पूरी चुनाव प्रक्रिया पर शुरू से ही सवालिया निशान थे। जब सिस्टम में गड़बड़ियां होंगी, तो नतीजे अप्रत्याशित ही आएंगे। ऐसा स्ट्राइक रेट पहले कभी नहीं देखा गया। 1984 में भी कांग्रेस का इतना स्ट्राइक रेट नहीं था, जितना इस बार भाजपा को मिला है। यह बेहद असामान्य है और इसकी जांच होनी चाहिए।’’
माकन ने आगे कहा कि गठबंधन के सहयोगी दलों से भी बात की गई है और उनका भी मानना है कि नतीजे सामान्य नहीं हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से भी लगातार शिकायतें आ रही हैं कि कई जगहों पर गड़बड़ियां हुई हैं। पार्टी अब फॉर्म 17C, मतदाता सूची और बूथवार आंकड़ों को इकट्ठा कर रही है, ताकि विस्तृत विश्लेषण के बाद तथ्यों के आधार पर अपनी बात रख सके।
बिहार विधानसभा चुनाव का समग्र परिणाम
बिहार में दो चरणों—6 और 11 नवंबर—में मतदान हुआ और 14 नवंबर को नतीजे घोषित किए गए। मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच था। एनडीए ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 202 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत (122 सीट) से बहुत आगे निकल गया। वहीं महागठबंधन को मात्र 35 सीटें मिलीं। इसके अलावा एआईएमआईएम को 5 और बीएसपी को 1 सीट पर जीत मिली।