कानपुर LPS में हर डॉक्टर का वेरिफिकेशन अनिवार्य
लखनऊ: दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके के बाद एंटी टेरर स्क्वाड (ATS) ने इंटीग्रल यूनिवर्सिटी प्रशासन से विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले 60 कश्मीरी छात्र-छात्राओं की विस्तृत रिपोर्ट और पृष्ठभूमि की जानकारी मांगी है। मामला उस समय संवेदनशील बन गया जब बताया गया कि यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले कुछ चिकित्सक और स्टाफ़ का मामला जांच के दायरे में आया है — इनमें से डॉ. परवेज़ का नाम भी जुड़ा है, जिन्होंने धमाके से ठीक तीन दिन पहले यूनिवर्सिटी से इस्तीफ़ा दे दिया था। एटीएस के मुताबिक़ डॉ. परवेज़, डॉ. शाहीन के स्वजन बताए जा रहे हैं, इसलिए भी इस यूनिट की कड़ी पड़ताल की जा रही है।
मंगलवार को एटीएस ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के कुछ अधिकारियों से पूछताछ की और दस्तावेज़ों की जाँच की। इसी दौरान कानपुर से एक चिकित्सक डॉ. मोहम्मद आरिफ को हिरासत में लिया गया — आरिफ जिनको कुछ महीने पहले ही कानपुर के एक बड़े हृदय संस्थान (LPS Cardiology Institute) में नियुक्त किया गया था। सूत्रों के अनुसार आरिफ को शाहीन सिद्दीकी का करीबी बताया जा रहा है, इसलिए उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
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कानपुर के प्रमुख हृदय संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश कुमार वर्मा ने कहा कि मामले की नाजुकता को देखते हुए संस्थान ने सभी डॉक्टरों के तीन-स्तरीय वेरिफिकेशन (शैक्षणिक दस्तावेज़, पुलिस-पृष्ठभूमि व पेशेवर प्रमाणन) अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। डॉ. वर्मा ने बताया कि आरिफ का चयन ऑल-इंडिया सलेक्शन के जरिए हुआ था और संस्थान में उनका व्यवहार सामान्य तौर पर पेशेवर रहा, लेकिन अब सुरक्षा एजेंसियों की दिशा-निर्देशों के अनुरूप हर संभावित शक के लिए कठोर सत्यापन होगा।
निदेशक ने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज के डीन द्वारा एडमिशन व डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होता है, पर मौजूदा घटनाक्रम से सबक लेते हुए संस्थान स्वयं भी एक आंतरिक टीम गठित कर डॉक्टरों व स्टाफ के पुलिस और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराएगा। यदि किसी को संदिग्ध पाया गया तो तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित कर सहयोग किया जाएगा।
डॉ. वर्मा ने यह भी कहा कि संस्थान में फिलहाल जम्मू-कश्मीर के पांच डॉक्टर/छात्र कार्यरत हैं जिनका विशेष वेरिफिकेशन तुरंत कराया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लक्ष्य देश के चिकित्सा पेशे की प्रतिष्ठा बनाए रखना और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि का समय पर पता लगाना है।