भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड नेशनल हाईवे के डिजाइन और विकास के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, जिससे सड़कों के डिजाइन में एकरूपता, सुरक्षा और ट्रैफिक प्रवाह में सुधार का लक्ष्य रखा गया है। यह नियम आने वाले 4 और 6 लेन वाले ग्रीनफील्ड व ब्राउनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर पर लागू होंगे।
ट्रैफिक के हिसाब से लेन और चौड़ाई कैसे तय होगी?
NHAI ने यूनिफॉर्म डिजाइन फ्रेमवर्क तैयार किया है, जहाँ ट्रैफिक आकलन के आधार पर लेन कॉन्फ़िगरेशन और कॉरिडोर चौड़ाई तय की जाएगी।
उद्देश्य: DPRs (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स) में तकनीकी मानकों की स्थिरता लाना और नेटवर्क भर में ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाना।
एंट्री-एग्जिट की पहले से जानकारी: अचानक ब्रेक/लेन चेंज कम
नई गाइडलाइन में सड़क सुरक्षा पर खास जोर है: हाई-स्पीड ट्रैफिक को देखते हुए एंट्री और एग्जिट प्वाइंट की जानकारी ड्राइवरों को पहले से देने की व्यवस्था की जाएगी। इससे चालक समय रहते लेन और दिशा बदल सकेंगे और अचानक ब्रेक/लेन चेंज की स्थिति कम होगी।
प्रमुख सड़कों पर बनेंगे रैंप वाले इंटरचेंज
एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और अधिक ट्रैफिक वाली महत्वपूर्ण सड़कों के क्रॉसिंग पर रैंप वाले इंटरचेंज बनाए जाएंगे।
इसके अलावा बंदरगाह, एयरपोर्ट, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP), औद्योगिक क्षेत्र और बड़े पर्यटन स्थलों जैसे प्रमुख ट्रैफिक जनरेटिंग पॉइंट्स से जोड़ने वाली सड़कों पर भी इंटरचेंज की व्यवस्था होगी।
अवैध एंट्री और आवारा पशुओं पर रोक: 1 मीटर बाउंड्री वॉल
हाई-स्पीड कॉरिडोर पर अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए बाहरी किनारे पर 1 मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल बनाने का प्रावधान किया गया है। इसका मकसद लोगों द्वारा अवैध रास्ते से हाईवे में घुसने और आवारा मवेशियों के सड़क पर आने जैसी घटनाओं को रोकना है।