उमर अब्दुल्ला ने गाया पूरा वंदे मातरम् तो भड़की कांग्रेस, जानिए किस पार्टी का क्या है रुख

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जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आयोजित एक फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन के दौरान उठा राजनीतिक तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कार्यक्रम के दौरान जब राष्ट्रगीत वंदे मातरम् बजा, तो जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला पूरे 3 मिनट 10 सेकंड तक इसके सम्मान में खड़े रहे।

उमर अब्दुल्ला के पूरा वंदे मातरम् गाने और सम्मान देने का वीडियो सामने आने के बाद अब कांग्रेस पार्टी ने इस पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण देश की बहुलतावादी सोच के अनुकूल नहीं है। वहीं बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर करारा हमला बोला है।

वंदे मातरम् विवाद

श्रीनगर की इस घटना के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर अपनी बात रखी। उन्होंने महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना आजाद जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों का हवाला दिया। कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों से आग्रह किया कि वे आजादी के समय तय की गई परंपराओं का पालन करें।

कांग्रेस की नीति के मुताबिक, पार्टी वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरे गाने के ही पक्ष में है। पार्टी का मानना है कि केवल दो अंतरे गाना ही भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान को मजबूत रखता है और सांप्रदायिकता से दूर रखता है।

बीजेपी का कांग्रेस पर तीखा हमला

कांग्रेस के इस रुख पर भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पूरी तरह से कट्टरपंथियों के हाथ की कठपुतली बन चुकी है।

बीजेपी ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस के अपने ही सहयोगी दलों को पूरे वंदे मातरम् से कोई ऐतराज नहीं है, तो फिर कांग्रेस इस मुद्दे पर इतना अड़ियल रुख क्यों अपना रही है। 15 अगस्त को सोनिया गांधी के एक वीडियो के बाद से ही बीजेपी इस मुद्दे पर कांग्रेस को लगातार घेर रही है।

विपक्षी गठबंधन में पड़ रही फूट

वंदे मातरम् के मुद्दे पर कांग्रेस अपने ही सहयोगियों के बीच अकेली पड़ती दिख रही है। इंडिया गठबंधन के कई दल कांग्रेस की इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते हैं।

जहां उमर अब्दुल्ला पहले से ही पूरे राष्ट्रगीत के समर्थन में रहे हैं, वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT), अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और शरद पवार की NCP-SP ने भी इस मामले में कांग्रेस का रुख नहीं अपनाया है। टीएमसी और डीएमके जैसे दल पूरे गीत को अनिवार्य बनाने के खिलाफ जरूर हैं, लेकिन वे भी कांग्रेस की तरह कड़ा विरोध दर्ज नहीं करा रहे हैं।

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