सैमसंग इंडिया में छंटनी का दौर शुरू

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दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में शामिल सैमसंग को इंडियन मार्केट में भी बढ़ते कॉम्पिटिशन और लागत का दबाव झेलना पड़ रहा है। इसी बीच सैमसंग इंडिया के कर्मचारियों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है।

 

कंपनी ने अपने कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (CE) डिवीजन में 8 से 10 मिड-टू-सिनियर लेवल कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है। इतना ही नहीं, आने वाले हफ्तों में 40 से 50 और कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी की जा रही है।

 

इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक छंटनी का विवरण

सूत्रों के मुताबिक, छंटनी के पहले चरण में जनरल मैनेजर, टीम लीड, ब्रांच या एरिया मैनेजर और डायरेक्टर लेवल तक के कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। सैमसंग के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स डिवीजन में करीब 500 से 600 अधिकारी काम करते हैं।

 

कंपनी इस पूरी कवायद के जरिए लागत कम करने और कामकाज को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक कुल मिलाकर 80–100 अधिकारियों को अलग-अलग चरणों में बाहर जाने के लिए कहा गया है और सेल्स-मार्केटिंग वर्कफोर्स का करीब 25% हिस्सा प्रभावित हो सकता है।

 

40-50 और कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज

सूत्रों के अनुसार, छंटनी का दूसरा दौर भी जल्द शुरू हो सकता है। इसमें करीब 40 से 50 कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। इसके अलावा कंपनी देशभर में अपने कुछ ब्रांच ऑफिस को मर्ज भी कर रही है।

 

पटना और रांची की ब्रांच को पहले ही मर्ज किया जा चुका है। दिल्ली-गुरुग्राम और पंजाब-चंडीगढ़ समेत कुछ अन्य ब्रांचों के विलय की प्रक्रिया भी चल रही है। इससे भी कुछ पद खत्म हो सकते हैं।

 

बढ़ते कॉम्पिटिशन और कमजोर मांग बनी वजह

सैमसंग के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस में टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और दूसरे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स शामिल हैं। टीवी बाजार में कंपनी मजबूत स्थिति में है, लेकिन घरेलू उपकरणों के क्षेत्र में उसे चाइनीज और अन्य प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से कड़ी चुनौती मिल रही है। दूसरी ओर, उपभोक्ता मांग में नरमी और इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनी के मार्जिन पर दबाव बढ़ा है।

 

रुपये की कमजोरी और महंगे चिप्स ने बढ़ाई परेशानी

भारतीय रुपये की डॉलर के मुकाबले कमजोरी से आयातित कंपोनेंट्स की लागत बढ़ी है। इसके अलावा पिछले एक साल में मेमोरी चिप्स की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।

 

AI, डेटा सेंटर और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। इन परिस्थितियों ने कंपनियों की लागत और मार्जिन दोनों पर असर डाला है।

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