दुनिया की सबसे बड़ी राइड-हेलिंग कंपनियों में शुमार उबर (Uber) ने कॉरपोरेट जगत को बड़ा झटका देते हुए छंटनी का बड़ा ऐलान किया है। कंपनी अपने ग्लोबल वर्कफोर्स यानी कुल कर्मचारियों की संख्या में लगभग 10 फीसदी की भारी कटौती करने जा रही है।
कंपनी के इस बड़े फैसले का सीधा असर करीब 3,400 कर्मचारियों की नौकरियों पर पड़ने वाला है। उबर का कहना है कि यह कदम संगठन को सरल बनाने, मैनेजमेंट के बेफिजूल स्तरों (लेयर्स) को हटाने और काम करने की रफ्तार को तेज करने के लिए उठाया गया है। आइए जानते हैं कि टेक दिग्गज उबर ने अचानक इतना बड़ा फैसला क्यों लिया और इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
सीईओ दारा खोसरोशाही ने मेमो जारी कर दी जानकारी
उबर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) दारा खोसरोशाही ने सभी कर्मचारियों को एक आधिकारिक मेमो भेजकर इस कठोर निर्णय की जानकारी दी है। खोसरोशाही ने बताया कि प्रभावित होने वाले अधिकांश कर्मचारियों को इसकी सूचना दे दी गई है। जिन देशों में स्थानीय श्रम कानून थोड़े अलग हैं, वहां कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारियों को सूचित किया जाएगा।
उबर की हालिया वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनियों में कुल मिलाकर लगभग 34,000 कर्मचारी काम करते हैं। इस हिसाब से 10 प्रतिशत छंटनी का सीधा मतलब करीब 3,400 लोगों का रोजगार छिनना है।
कंपनी ने क्यों लिया इतनी बड़ी छंटनी का फैसला?
कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब उबर का बिजनेस अच्छा चल रहा है तो छंटनी क्यों? कंपनी के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में उबर का राजस्व (Revenue) लगभग तीन गुना बढ़ गया है और इस दौरान कंपनी ने कई नए क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया।
लेकिन इस तेज रफ्तार विस्तार की वजह से कंपनी के अंदर मैनेजमेंट की कई परतें बन गईं, जिससे फैसले लेने में देरी होने लगी। अब कंपनी छोटे-छोटे ‘माइक्रो-टीम्स’ को खत्म करके मैनेजर्स की जिम्मेदारियों को बढ़ाना चाहती है। कंपनी का मानना है कि मैनेजमेंट का ढांचा कम होने से फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और ब्यूरोक्रेसी कम होगी।
भारत में भी नौकरियों पर असर, लेकिन बना रहेगा प्रमुख बाजार
उबर ने स्पष्ट किया है कि इस ग्लोबल छंटनी का असर भारत में काम कर रहे कुछ कर्मचारियों की भूमिकाओं (Roles) पर भी पड़ेगा। हालांकि, भारत के बाजार को लेकर कंपनी का रुख काफी सकारात्मक है।
उबर ने साफ किया है कि भारत उसके लिए हमेशा की तरह एक बेहद अहम और बड़ा बाजार बना रहेगा। कंपनी भारत में अपने रीजनल ऑपरेशंस को और मजबूत करने तथा पूरे एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र में मोबिलिटी बिजनेस को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। भारत में ड्राइवर्स और राइडर्स के लिए नए इनोवेशन जारी रहेंगे।
वर्क फ्रॉम होम खत्म: कर्मचारियों को हफ्ते में 3 दिन आना होगा ऑफिस
छंटनी के साथ-साथ उबर ने अपनी वर्क कल्चर पॉलिसी में भी बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब अपने कर्मचारियों को चुनिंदा ‘हब’ शहरों में इकट्ठा कर रही है। रिमोट काम कर रहे ज्यादातर कर्मचारियों को तुरंत ऑफिस लौटने के निर्देश दे दिए गए हैं।
आने वाले दिनों में उबर के केवल 1 फीसदी कर्मचारी ही पूरी तरह से ‘रिमोट वर्क’ कर पाएंगे। बाकी सभी कर्मचारियों के लिए हाइब्रिड मॉडल लागू रहेगा, जिसके तहत हफ्ते में कम से कम तीन दिन ऑफिस आकर काम करना अनिवार्य होगा।