उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लूएंजा-A (H1N1) के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह से हरकत में आ गई है। प्रदेशवासियों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को घोषणा की है कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वाइन फ्लू की जांच बिल्कुल मुफ्त में की जाएगी।
इसके साथ ही, जिन जिलों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां इलाज और निगरानी की व्यवस्था को और ज्यादा पुख्ता करने के कड़े आदेश दिए गए हैं। आइए जानते हैं कि सरकार ने मरीजों की सहूलियत के लिए और क्या-क्या बड़े कदम उठाए हैं।
प्राइवेट लैब्स तय फीस से ज्यादा पैसे न वसूलें
राज्य में इन्फ्लूएंजा की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निजी अस्पतालों और प्राइवेट पैथोलॉजी लैब्स को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि प्राइवेट लैब्स H1N1 की जांच के लिए निर्धारित फीस से एक भी रुपया ज्यादा नहीं वसूल सकतीं।
अगर कोई लैब मरीजों से मनमानी फीस वसूलती पाई गई, तो उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसके अलावा, सभी अस्पतालों को दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने, जांच किट उपलब्ध कराने और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए अलग से आईसीयू (ICU) वार्ड तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
आशा और एएनएम घर-घर जाकर करेंगी स्क्रीनिंग
स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान करने के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम (ANM) की मदद से घर-घर जाकर स्क्रीनिंग तेज करने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही जो लोग अस्पताल जाने में असमर्थ हैं, उनके लिए प्रभावी ‘टेली-कंसल्टेशन’ सेवा शुरू की जा रही है, ताकि मरीज घर बैठे ही डॉक्टरों से सलाह ले सकें। अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग से स्पेशल काउंटर बनाए जा रहे हैं ताकि सामान्य मरीजों को कोई परेशानी न हो।
उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के अब तक 685 मरीज
समीक्षा बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदेश में अब तक लैब से पुष्टि किए गए स्वाइन फ्लू के कुल 685 मामले सामने आ चुके हैं। यह वायरस मुख्य रूप से मरीज के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों से फैलता है।
इसमें तेज बुखार, नाक बहना, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में तेज ऐंठन और आंखें लाल होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सीएम योगी ने निर्देश दिया है कि हल्के लक्षण वाले मरीजों को घर पर ही आइसोलेट होकर आराम करने की सलाह दी जाए, जबकि गंभीर मरीजों का तुरंत अस्पताल में इलाज शुरू किया जाए।
बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर खास ध्यान
सरकार ने स्पष्ट किया है कि छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी (जैसे शुगर, बीपी, हार्ट) से पीड़ित लोगों को इस वायरस से ज्यादा खतरा है। इसलिए इन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने भी प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) और जिला अस्पतालों को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।