नेपाल और चीन ने गुरुवार को हिमालय में फिर से बाढ़ आने के खतरे की चेतावनी दी। दोनों देशों की सीमा के दोनों ओर दो झीलें बन गई हैं, जिससे उनके फटने का डर पैदा हो गया है, जबकि यह इलाका इस हफ़्ते आई भयानक बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है।
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि बाढ़ वाली जगह पर मलबे से नदी का रास्ता रुकने के कारण बनी झील का जलस्तर बढ़ रहा है और उसके फटने का खतरा है।
अथॉरिटी ने जारी की सतर्कता
अथॉरिटी ने कहा, “निचले किनारों पर रहने वाले लोगों… यात्रियों, बचाव कार्यों में लगे बचाव कर्मियों और सभी संबंधित लोगों से अनुरोध है कि वे खास सावधानी बरतें और नदी के किनारों तथा जोखिम वाली जगहों से दूर सुरक्षित स्थानों पर रहें।”
काठमांडू स्थित ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट’ में जलवायु और पर्यावरण जोखिम विभाग के प्रमुख और जलवायु विशेषज्ञ कियांगगोंग झांग ने कहा कि नेपाल-चीन सीमा पर नदी के ऊपरी हिस्से में मलबे के कारण रुकावट का मतलब है कि दूसरी बाढ़ “कभी भी आ सकती है”।
झांग ने कहा, “नेपाल-चीन सीमा पर नदी के ऊपरी हिस्से में अभी भी रुकावट बनी हुई है, इसलिए अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि दूसरी बाढ़ कभी भी आ सकती है।”
मृतकों की संख्या 400 के करीब
नेपाल और तिब्बत में बचावकर्मी अभी भी जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं। बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने घरों को तबाह कर दिया, पुल बहा दिए और सड़कों को पानी में डुबो दिया। मरने वालों की संख्या बढ़कर 400 के करीब पहुंच गई है और 1,400 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
बाढ़ के बाद 30 से ज़्यादा देशों के लोग लापता
नेपाल पुलिस ने पुष्टि की है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के टूटने और भूस्खलन के कारण आई भयानक अचानक बाढ़ और मलबे के भारी बहाव से मरने वालों की संख्या बढ़कर 389 हो गई है। इस हादसे में से कई विदेशी थे जो ट्रेकिंग, गाइडेड टूर या किसी पवित्र हिंदू स्थल की तीर्थयात्रा के लिए वहां गए थे।