केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ICAR-IARI, पूसा में देशभर के कृषि विद्यार्थियों के लिए बड़ी पहल की। नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) के माध्यम से 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को कुल 21.35 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप और फेलोशिप राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए जारी की गई।
इस नई व्यवस्था के तहत कृषि विद्यार्थियों को अब हर महीने स्कॉलरशिप की राशि सीधे उनके बैंक खातों में मिलेगी। सरकार का कहना है कि इससे स्कॉलरशिप वितरण में होने वाली देरी कम होगी और विद्यार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध हो सकेगी।
स्कॉलरशिप सिर्फ आर्थिक मदद नहीं: शिवराज सिंह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्कॉलरशिप केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कृषि शिक्षा को मजबूत और विद्यार्थियों के लिए अधिक अवसरों से जोड़ने का महत्वपूर्ण जरिया है। उन्होंने कहा कि DBT व्यवस्था से विद्यार्थियों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से सहायता मिल सकेगी।
उन्होंने कृषि विद्यार्थियों से प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उनका कहना था कि केवल कक्षा में पढ़ाई करने से अच्छे किसान, वैज्ञानिक या कृषि उद्यमी तैयार नहीं हो सकते। विद्यार्थियों को खेतों, प्रयोगशालाओं और वास्तविक कृषि परिस्थितियों से जुड़कर सीखने की जरूरत है।
नवाचार और स्टार्टअप पर दिया जोर
शिवराज सिंह चौहान ने युवाओं से केवल नौकरी को अपना लक्ष्य न बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कृषि विद्यार्थी नवाचार, स्टार्टअप और अनुसंधान के क्षेत्र में भी आगे बढ़ें और देश की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने में योगदान करें।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में फूड सिक्योरिटी, न्यूट्रिशन और किसान आय सुरक्षा को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही। साथ ही ICAR के वैज्ञानिकों और किसानों के योगदान की सराहना की।
हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण की अपील
कृषि मंत्री ने हरियाली अमावस्या के अवसर पर देशभर के ICAR संस्थानों में कृषि विद्यार्थियों से पौधारोपण करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और हरित पहल कृषि क्षेत्र के साथ-साथ पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, सचिव ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, डीडीजी डॉ. यशपाल सिंह मलिक और IARI के निदेशक डॉ. सी. श्रीनिवास राव समेत वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और विद्यार्थी मौजूद रहे। हजारों छात्र ऑनलाइन माध्यम से भी कार्यक्रम से जुड़े।