उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि विधानसभा परिसर के बाहर राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने राम मंदिर चंदा, बेरोजगारी, बिजली संकट, कानून-व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को राजनीतिक नौटंकी करार दिया।
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी दलों के विधायकों से सदन का समय जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा में लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए ताकि जनता की समस्याओं का समाधान निकल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डबल इंजन सरकार ने पिछले नौ वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालकर उनके जीवन स्तर में सुधार किया है और इसमें विधानसभा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि विपक्ष सदन में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी, बिजली संकट, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याओं और स्कूलों के बंद होने जैसे मुद्दे उठाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि “प्रभु राम के चढ़ावे पर डाका डाला गया है” और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी के नेता ज़ाहिद बेग विधानसभा परिसर में साइकिल से पहुंचे। उनके हाथ में राम मंदिर चंदे में कथित गबन और E20 पेट्रोल से जुड़े पोस्टर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को शिक्षा नीति, युवाओं के भविष्य और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने नई शिक्षा नीति की समीक्षा की मांग करते हुए छात्रों को कानूनी मामलों में परेशान न करने की भी बात कही।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने विपक्ष के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हर विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष केवल प्रदर्शन और नारेबाजी करता है, जबकि प्रदेश के विकास और जनता की वास्तविक समस्याओं से उसका कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार सदन में हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है और विपक्ष को सड़क की बजाय सदन के भीतर चर्चा करनी चाहिए।
मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। आने वाले दिनों में सदन के भीतर कानून-व्यवस्था, रोजगार, कृषि, बिजली और अन्य जनहित के मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।