New Delhi|Flipkart‑Myntra पर अभी आरोप यह है कि वे प्लेटफॉर्म पर एक छुपे हुए “सब्सिडी पूल” के ज़रिए चुनिंदा सेलर्स को भारी डिस्काउंट का फायदा देकर बाकी सेलर्स के साथ भेदभाव कर रहे हैं, जिस पर CCI में शिकायत की गई है।
मामला क्या है?
फोरम फॉर इंटरनेट रिटेलर्स (FIRST) नाम के सेलर‑ग्रुप ने Competition Commission of India (CCI) में शिकायत दर्ज की है।
आरोप है कि Flipkart ने लगभग 3000 करोड़ रुपये का एक “recurring subsidy / discount pool” बनाकर सिर्फ 33 पसंदीदा सेलर्स को फायदा पहुंचाया।
इन 33 सेलर्स को ग्रुप की अन्य इकाइयों से कर‑फायदा, लॉजिस्टिक डिस्काउंट और मार्केटिंग सब्सिडी मिलती है, जिससे वे बाकी सेलर्स की तुलना में बहुत कम दाम पर बेच सकते हैं।
डिस्काउंट खेल कैसे काम करता बताया जा रहा है?
शिकायत के मुताबिक Flipkart‑ग्रुप के अंदर कुछ कंपनियाँ इन चुनिंदा सेलर्स को अतिरिक्त मार्जिन/सब्सिडी देती हैं, जो प्रोडक्ट प्राइस को नीचे खींचती है।
जब ये 33 सेलर्स भारी डिस्काउंट के साथ टॉप पर दिखते हैं, तो इंडिपेंडेंट सेलर्स की बिक्री गिरती है और वे प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते।
आरोप यह भी है कि प्रोडक्ट‑लिस्टिंग और सर्च रिज़ल्ट में इन्हीं सेलर्स को एल्गोरिदमिक प्राथमिकता मिलती है, जिससे उनका विज़िबिलिटी फायदा और बढ़ जाता है।
3000 करोड़ का “सब्सिडी पूल” क्या मतलब?
FIRST की शिकायत में दावा है कि Flipkart ने लगभग 3000 करोड़ रुपये का एक सब्सिडी या डिस्काउंट पूल बनाया, जो हर साल/लगातार इन चुनिंदा सेलर्स को फनल होता है।
यह पैसा टैक्स ऑप्टिमाइज़ेशन, ग्रुप‑इंटरनल ट्रांसफर और ऑपरेशनल मार्जिन से निकाला जाता है, लेकिन नेट प्रभाव यह है कि प्लेटफॉर्म पर प्राइस‑वार असमान प्रतिस्पर्धा बनती है।
सेलर्स और CCI के लिए मुद्दा क्यों गंभीर है?
इंडिपेंडेंट सेलर्स का आरोप है कि वे “मार्केटप्लेस” पर बराबर मौका लेने आए थे, लेकिन प्लेटफॉर्म खुद कुछ पार्टनर सेलर्स को प्रिफर कर रहा है।
अगर CCI प्राथमिक जांच में पाती है कि ये मॉडल प्रतिस्पर्धा‑विरोधी (anti‑competitive) है, तो CCI विस्तृत इन्वेस्टिगेशन और संभावित निर्देश/जुर्माना पर आगे बढ़ सकती है।