लखनऊ। अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने सख्त रुख अपनाते हुए हादसे से जुड़ी बिल्डिंग के मालिकों को बड़ा अल्टीमेटम दिया है। LDA ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि भवन स्वामी स्वयं निर्धारित समय सीमा के भीतर भवन को ध्वस्त कर दें, अन्यथा प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई करते हुए भवन को जमींदोज कर दिया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित पक्षों पर कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
गौरतलब है कि 22 जून को अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। हादसे के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
जांच में सामने आया है कि जिस भवन में आग लगी, वह आवासीय क्षेत्र में स्थित था। सेक्टर-डी स्थित लगभग 1992 वर्गफुट के इस प्लॉट का नक्शा वर्ष 2014 में आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था, लेकिन बाद में इसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाने लगा। भवन में कोचिंग सेंटर, एनीमेशन सेंटर और पेट क्लिनिक जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, जो निर्धारित नियमों के विपरीत थीं।
LDA अधिकारियों के अनुसार भवन निर्माण में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। भवन में निर्धारित सेटबैक और खुला आंगन नहीं छोड़ा गया था। व्यावसायिक भवनों के लिए दो स्वतंत्र निकासी मार्ग अनिवार्य होते हैं, जबकि यहां केवल एक ही रास्ता उपलब्ध था। इतना ही नहीं, निकासी मार्ग पर एयर कंडीशनर की बाहरी यूनिटें लगी थीं, जिससे आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलना और भी मुश्किल हो गया।
SIT टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर निकासी मार्गों, सीढ़ियों, छत के दरवाजों और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जांच के दौरान कई दरवाजों पर ताले और बायोमेट्रिक लॉक लगे होने की जानकारी भी सामने आई, जिसने राहत एवं बचाव कार्य में बाधा उत्पन्न की।
प्रारंभिक जांच में विद्युत वायरिंग और उपकरणों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं। अधिकारियों का मानना है कि खराब गुणवत्ता की वायरिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी हादसे की बड़ी वजह हो सकती है।
LDA का कहना है कि यदि भवन स्वामी स्वयं कार्रवाई नहीं करते हैं, तो प्राधिकरण नियमानुसार भवन को ध्वस्त करेगा और कार्रवाई का खर्च भी संबंधित पक्षों से वसूला जाएगा। साथ ही शहर में अन्य व्यावसायिक भवनों और कोचिंग संस्थानों की भी सुरक्षा जांच तेज किए जाने की तैयारी है।
प्रशासन का मानना है कि इस हादसे से सबक लेते हुए फायर सेफ्टी, भवन उपयोग और आपातकालीन निकासी मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।