भारत की तेजी से बढ़ती क्विक-कॉमर्स कंपनी Zepto इन दिनों अपने IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) की तैयारियों में जुटी है। हालांकि, कंपनी की ओर से दाखिल किए गए अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में कुछ ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन घाटा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
DRHP के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में Zepto का शुद्ध घाटा बढ़कर 5,905 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। पिछले वित्त वर्ष में यह घाटा करीब 4,700 करोड़ रुपये था। दूसरी ओर, कंपनी की आय में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। Zepto का ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर 22,623 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। इससे साफ है कि कंपनी तेजी से विस्तार कर रही है, लेकिन अभी मुनाफा कमाने से काफी दूर है।
कंपनी को नियामक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। अप्रैल 2026 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Zepto के सह-संस्थापकों आदित पलीचा और कैवल्य वोहरा को समन भेजकर विदेशी निवेश और कंपनी की शेयरहोल्डिंग से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। कंपनी ने इसका जवाब दे दिया है, लेकिन जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऐसे में निवेशकों की नजर इस मामले पर बनी हुई है।
इसके अलावा Zepto पर ग्राहकों को भ्रमित करने वाले कुछ डिजिटल तरीकों यानी “डार्क पैटर्न” इस्तेमाल करने का आरोप भी लगा था। इस मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कंपनी पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि कंपनी ने इस आदेश को चुनौती दी है और फिलहाल उसे अंतरिम राहत मिली हुई है।
Zepto का पूरा बिजनेस मॉडल उसके डार्क स्टोर्स पर आधारित है। कंपनी के पास फिलहाल 1,139 डार्क स्टोर्स हैं, जिनकी मदद से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा किया जाता है। लेकिन इन स्टोर्स के विस्तार में भारी निवेश की जरूरत होती है, जिससे खर्च लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Zepto का IPO निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकता है, लेकिन बढ़ता घाटा, कानूनी चुनौतियां और कड़ी प्रतिस्पर्धा बड़े जोखिम भी हैं। ऐसे में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाओं को ध्यान से समझना जरूरी होगा।