बिजली कर्मियों का जन-जागरण तेज

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लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर पूर्वांचल में बिजली कर्मचारियों ने जन-जागरण अभियान तेज कर दिया है। बस्ती और गोरखपुर से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब ओबरा और अनपरा जैसी बड़ी परियोजनाओं सहित कई जिलों में विरोध सभाएं आयोजित की जाएंगी।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि सरकार और ऊर्जा विभाग द्वारा कर्मचारियों पर लगातार दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। कर्मचारियों, अभियंताओं और संविदा कर्मियों पर दर्ज एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानों पर तबादले और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को लेकर कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

विरोध सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, मोहम्मद वसीम और प्रेमनाथ राय ने कहा कि 3 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री और शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते को अब तक लागू नहीं किया गया। इससे बिजली कर्मियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

संघर्ष समिति ने मांग की कि मार्च 2023 के आंदोलन के बाद कर्मचारियों पर की गई सभी कार्रवाई तुरंत वापस ली जाए। साथ ही हटाए गए संविदा कर्मियों की बहाली, आउटसोर्स कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित करने और स्टेट विजिलेंस जांच समाप्त करने की मांग भी उठाई गई।

कर्मचारियों ने फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर तबादले, स्मार्ट मीटर लगाने के दबाव और ट्रांसफार्मर खराब होने पर अभियंताओं से वसूली जैसे आदेशों का भी विरोध किया। संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता और उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों का नहीं बल्कि सस्ती, सुलभ और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था बचाने की लड़ाई है। समिति ने चेतावनी दी कि निजीकरण से बिजली महंगी होगी और सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।

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