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एयरपोर्ट्स बने हाई-टेक स्मगलिंग का नया हब
देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर सोने की तस्करी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, और हाल ही में बेंगलुरु के केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सामने आया मामला इस खतरे को और गंभीर बना देता है। इस घटना में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने करीब 5 करोड़ रुपये का सोना बेहद चौंकाने वाले तरीके से छिपा रखा था।
तस्करों ने सोने को पेस्ट और कैप्सूल के रूप में बदलकर शरीर के अंदर छिपाया था, जिससे यह सामान्य स्कैनिंग में पकड़ में न आए। यह तरीका बताता है कि अब तस्करी का नेटवर्क न सिर्फ संगठित हो चुका है, बल्कि तकनीकी और रणनीतिक रूप से भी काफी उन्नत हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में सोने की भारी मांग और आयात शुल्क की वजह से तस्करी का यह धंधा लगातार फल-फूल रहा है। तस्कर नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने की कोशिश करते हैं, लेकिन राजस्व खुफिया निदेशालय और अन्य एजेंसियां भी अब हाई-टेक निगरानी और खुफिया तंत्र के जरिए इन पर नकेल कस रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह पहला मामला नहीं है। साल 2025 में भी इसी एयरपोर्ट पर एक चर्चित केस में एक कन्नड़ अभिनेत्री के पास से 12 करोड़ रुपये से अधिक का सोना बरामद किया गया था। इससे साफ है कि तस्करी का यह नेटवर्क कई स्तरों पर फैला हुआ है।
इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। एयरपोर्ट्स पर अब केवल सामान की जांच ही नहीं, बल्कि यात्रियों की गतिविधियों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। इसके लिए आधुनिक स्कैनिंग तकनीक और प्रोफाइलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सरकार और एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस तस्करी के पीछे के मास्टरमाइंड तक कैसे पहुंचा जाए। क्योंकि अक्सर पकड़े जाने वाले लोग सिर्फ छोटे स्तर के कैरियर होते हैं, जबकि असली नेटवर्क पर्दे के पीछे काम करता है।
इस घटना के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में एयरपोर्ट सुरक्षा को और मजबूत करना होगा, ताकि इस तरह के खतरनाक और अवैध नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।