नेपाल में हुए हालिया आम चुनावों ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने अभूतपूर्व जीत हासिल करते हुए 182 सीटों के साथ बहुमत प्राप्त किया है। इस जीत ने पारंपरिक राजनीतिक दलों को बड़ा झटका दिया है।
5 मार्च 2026 को हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया। 275 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 138 सीटों की जरूरत होती है, लेकिन आरएसपी ने इससे कहीं अधिक सीटें जीतकर अपनी मजबूत स्थिति साबित कर दी।
इस चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान नेपाली कांग्रेस को हुआ, जिसे केवल 38 सीटों पर संतोष करना पड़ा। पार्टी ने ‘इस बार 100 पार’ का नारा दिया था, लेकिन परिणाम इसके बिल्कुल विपरीत आए। इस हार की जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी अध्यक्ष गगन थापा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
गगन थापा खुद भी चुनाव हार गए। उन्हें धनुषा-4 सीट से आरएसपी के उम्मीदवार अमरेश सिंह ने पराजित किया। यह हार पार्टी के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि थापा को भविष्य के प्रमुख नेताओं में गिना जाता था।
चुनाव के बाद की राजनीतिक गतिविधियां तेजी से चल रही हैं। आरएसपी ने अपने नेता बालेंद्र शाह को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना है। 27 मार्च को उनके शपथ ग्रहण का कार्यक्रम तय किया गया है, जबकि 26 मार्च को सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी।
शपथ ग्रहण समारोह इस बार अस्थायी हॉल में आयोजित किया जाएगा, क्योंकि नया संसद भवन अभी निर्माणाधीन है। संघीय संसद सचिवालय के प्रवक्ता एकराम गिरी ने बताया कि कार्यक्रम की सभी तैयारियां जोरों पर हैं।
चुनाव आयोग ने भी अपनी प्रक्रिया पूरी करते हुए अंतिम परिणाम राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को सौंप दिए हैं। राष्ट्रपति ने चुनावों के शांतिपूर्ण और निष्पक्ष आयोजन के लिए आयोग की सराहना की है।
इस चुनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नेपाल की जनता अब नई सोच और नए नेतृत्व को मौका देना चाहती है। आरएसपी की जीत और पारंपरिक दलों की हार इसी बदलाव का संकेत है।
अब सभी की नजरें नई सरकार पर हैं, जो आने वाले दिनों में देश की नीतियों और विकास की दिशा तय करेगी। बालेंद्र शाह के नेतृत्व में बनने वाली सरकार से जनता को कई उम्मीदें हैं—चाहे वह सुशासन हो, पारदर्शिता हो या विकास की नई गति।