न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 मैच में मिली हार भले ही सीरीज के नतीजे को न बदले, लेकिन इस मुकाबले ने भारतीय टीम की कुछ कमजोरियों को जरूर उजागर कर दिया। यह हार सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं थी, लेकिन मैच के अहम मोड़ पर हुई गलतियों ने टीम इंडिया को पीछे धकेल दिया।
न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए आक्रामक अंदाज में रन बनाए। भारतीय गेंदबाजों को न पावरप्ले में सफलता मिली और न ही डेथ ओवरों में नियंत्रण दिखा। 215 रन का स्कोर इस बात का संकेत था कि भारत को बल्लेबाजी में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।
लेकिन भारतीय पारी की शुरुआत ने ही सारी योजना बिगाड़ दी। अभिषेक शर्मा का पहली गेंद पर आउट होना और इसके तुरंत बाद सूर्यकुमार यादव का सस्ते में विकेट गंवाना टीम के लिए बड़ा झटका था। इसके बाद मैच को संभालने की जिम्मेदारी अनुभवी बल्लेबाजों पर आ गई।
इस स्थिति में संजू सैमसन की भूमिका बेहद अहम थी। वह क्रीज पर टिक चुके थे, पावरप्ले पार हो चुका था और दूसरे छोर पर रिंकू सिंह जैसे भरोसेमंद बल्लेबाज मौजूद थे। यह वह समय था जब संजू को पारी को आगे बढ़ाना था और रनचेज को नियंत्रण में रखना था।
हालांकि संजू ने कुछ आकर्षक शॉट जरूर लगाए, लेकिन वह अपनी पारी को बड़ा नहीं कर सके। 15 गेंदों में 24 रन बनाकर आउट होना उस समय टीम के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ। इस विकेट के बाद रन रेट अचानक बढ़ गया और बल्लेबाजी क्रम पर दबाव आ गया।
रिंकू सिंह ने संघर्ष जरूर किया और शिवम दुबे ने अंत में आक्रामक बल्लेबाजी दिखाई, लेकिन तब तक लक्ष्य हाथ से फिसल चुका था। अगर संजू सैमसन 10-12 ओवर तक क्रीज पर टिक जाते, तो मैच का परिणाम पूरी तरह बदल सकता था।
क्रिकेट एक टीम गेम है और हार-जीत का जिम्मा किसी एक खिलाड़ी पर नहीं डाला जा सकता। गेंदबाजों की विफलता और शीर्ष क्रम की नाकामी भी बराबर की जिम्मेदार रही। लेकिन मैच के निर्णायक क्षणों में जिस खिलाड़ी से सबसे ज्यादा उम्मीद थी, वही अगर मोर्चा संभालने में चूक जाए, तो आलोचना स्वाभाविक है।
इसी वजह से चौथे टी20 मैच में संजू सैमसन को हार का विलेन माना जा रहा है। यह मैच उनके लिए एक बड़ा मौका था, जिसे वह भुना नहीं सके। आने वाले मैचों में उनसे ज्यादा जिम्मेदार और परिपक्व बल्लेबाजी की उम्मीद की जाएगी।