अयोध्या से मथुरा तक राष्ट्रपति मुर्मू का धार्मिक प्रवास

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देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का हालिया उत्तर प्रदेश दौरा पूरी तरह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से भरपूर रहा। उन्होंने पहले अयोध्या पहुंचकर श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन किए और उसके बाद मथुरावृन्दावन में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।

अयोध्या में राष्ट्रपति ने रामलला के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हुए देश की शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना की। यह दौरा उनके आध्यात्मिक झुकाव और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

इसके बाद राष्ट्रपति मथुरा पहुंचीं, जहां उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत मंदिरों में पूजा-अर्चना से की। वृन्दावन स्थित श्रीहित राधा केलि कुंज आश्रम में उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुने और उनसे विशेष भेंट की।

इस दौरान दोनों के बीच आध्यात्म, मानव सेवा और समाज कल्याण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। राष्ट्रपति ने संत के विचारों को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे संत समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आश्रम में राष्ट्रपति के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। पारंपरिक संगीत, भजन और पुष्प वर्षा के बीच उनका स्वागत किया गया। आश्रम परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के लिए यह एक यादगार क्षण बन गया।

राष्ट्रपति ने संत प्रेमानंद महाराज को उनके जन्मदिन के अवसर पर बधाई भी दी। इस दौरान उन्होंने संत को नमन करते हुए उनका आशीर्वाद लिया। संत ने भी उन्हें ‘राधे-राधे’ कहकर आशीर्वचन दिया और उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की।

पूरे दौरे के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे हर कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ। स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल लगातार मुस्तैद रहा।

राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति उनके सम्मान को भी उजागर करता है। इस तरह के दौरे देशवासियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संदेश देते हैं।

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