होर्मुज स्ट्रेट तनाव से खाड़ी देशों की फूड सप्लाई पर खतरा

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मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर धीरे-धीरे वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर दिखाई देने लगा है। अब तक जहां तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता जताई जा रही थी, वहीं अब विशेषज्ञ डेयरी उत्पादों की सप्लाई को लेकर भी चेतावनी दे रहे हैं।

रणनीतिक रूप से अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz के आसपास बढ़ती अनिश्चितता के कारण कई देशों को जरूरी खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा आने की आशंका है। अगर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो खाड़ी देशों में दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की उपलब्धता कम हो सकती है।

मध्य पूर्व के कई देश स्थानीय उत्पादन के बजाय आयात पर निर्भर रहते हैं। यही कारण है कि वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी प्रकार की बाधा सीधे तौर पर वहां के बाजारों को प्रभावित करती है।

आंकड़ों के मुताबिक 2024 में मध्य पूर्व ने करीब 4.2 अरब डॉलर मूल्य के डेयरी उत्पाद आयात किए। इनमें होल मिल्क पाउडर, पनीर और कंडेंस्ड मिल्क की मांग सबसे ज्यादा रही।

इस क्षेत्र के प्रमुख आयातकों में Saudi Arabia और United Arab Emirates शामिल हैं। इसके अलावा Iraq, Kuwait, Oman और Qatar भी बड़ी मात्रा में डेयरी उत्पाद खरीदते हैं।

खाड़ी सहयोग परिषद यानी Gulf Cooperation Council के देशों का डेयरी बाजार काफी बड़ा है। अकेले यूएई ने इस क्षेत्र के कुल डेयरी आयात में लगभग 43 प्रतिशत योगदान दिया है।

अगर समुद्री मार्गों में बाधा आती है तो जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ सकता है। इसके लिए उन्हें अफ्रीका के दक्षिणी छोर Cape of Good Hope से होकर गुजरना होगा। इससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ जाएंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति का असर केवल व्यापार पर ही नहीं बल्कि आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है। अगर सप्लाई कम होती है तो बाजार में कीमतें बढ़ने की संभावना है।

इस तरह देखा जाए तो मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव अब केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

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