देश के कई राज्यों में राज्यपाल और उपराज्यपाल के पदों पर किए गए हालिया बदलावों ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। केंद्र सरकार द्वारा किए गए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे ने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
जानकारी के अनुसार, डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने नई दिल्ली में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल अभी नवंबर 2027 तक था, इसलिए उनका अचानक इस्तीफा देना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे के कारणों का स्पष्ट रूप से खुलासा नहीं किया। उन्होंने केवल इतना कहा कि वह करीब साढ़े तीन साल तक राज्यपाल के रूप में काम कर चुके हैं और उनके लिए यह अवधि पर्याप्त है।
राजनीतिक स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस इस्तीफे पर हैरानी जताते हुए कहा कि वह इस अचानक फैसले से स्तब्ध और चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण पद से अचानक इस्तीफा देना कई सवाल पैदा करता है।
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वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी की टिप्पणियों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि राजभवन में बदलाव होना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे लेकर अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी नहीं होनी चाहिए।
इस फेरबदल के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यपालों और उपराज्यपालों के पदों पर समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं, लेकिन इस बार कई राज्यों में एक साथ हुए इन बदलावों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इन नियुक्तियों का असर राज्यों की राजनीति और प्रशासन पर देखने को मिल सकता है।