पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने संतुलित और कूटनीतिक रुख अपनाते हुए शांति का संदेश दिया है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विदेश नीति को स्पष्ट करते हुए बातचीत और सहयोग पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता से जुड़े हुए हैं। उन्होंने सभी देशों से संयम बरतने और संघर्ष को बढ़ाने के बजाय संवाद के रास्ते पर लौटने की अपील की। भारत का मानना है कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है।
सरकार ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर सहायता के लिए तैयार हैं।
इसी बीच भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाने का लक्ष्य तय किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक साझेदारी से दोनों देशों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और वैश्विक व्यापार सहयोग मजबूत होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में तकनीक, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में साझेदारी और गहरी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच भारत का संतुलित रुख अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करता है। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह शांति, सहयोग और वैश्विक स्थिरता का समर्थक देश है।