अयोध्या में सरयू नदी के घाटों से जलधारा दूर होने का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए इसे गलत नीतियों और अव्यवस्थित परियोजनाओं का परिणाम बताया है।
सांसद ने आरोप लगाया कि बड़े स्तर पर हुए बालू खनन ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित किया है। उनके मुताबिक सरयू की मुख्य धारा अब अयोध्या की बजाय गोंडा क्षेत्र की दिशा में बहने लगी है, जिससे धार्मिक स्थलों और घाटों पर पानी की उपलब्धता कम हो गई है।
उन्होंने कहा कि राम की पैड़ी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल पर पानी की कमी चिंताजनक है और अस्थायी इंतजामों के जरिए स्थिति संभाली जा रही है। यह स्थिति अयोध्या की धार्मिक पहचान और श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित कर सकती है।
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सपा सांसद ने धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरयू नदी केवल जल स्रोत नहीं बल्कि आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर किए जा रहे कार्य प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अवधेश प्रसाद ने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे को लोकसभा में उठाकर विस्तृत चर्चा की मांग करेंगे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो नदी संरक्षण और घाटों के पुनर्विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
फिलहाल इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में सरयू नदी और अयोध्या विकास मॉडल को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी बढ़ने के साथ यह मुद्दा और गंभीर हो सकता है और प्रशासन को दीर्घकालिक समाधान पर काम करना होगा।