इलाहाबाद हाई कोर्ट से अविमुक्तेश्वरानंद को अंतरिम राहत, गिरफ्तारी पर रोक

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ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है और अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाती है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ तत्काल कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। इस आदेश को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है।

यौन उत्पीड़न मामले में दर्ज हुई थी FIR

दरअसल, यह मामला यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, 21 फरवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ एक नाबालिग सहित दो व्यक्तियों के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत भी धाराएं लगाई गई हैं, जिसके बाद गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए हाई कोर्ट में राहत की याचिका दायर की गई थी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश दिया। अब इस मामले की विस्तृत सुनवाई अगली तारीख पर की जाएगी।

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नार्को टेस्ट के लिए भी जताई सहमति

मीडिया से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यदि नार्को टेस्ट से सच्चाई सामने आती है तो वह इसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सच सामने लाने के लिए जो भी कानूनी प्रक्रिया आवश्यक होगी, उसका वह स्वागत करेंगे।

उन्होंने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “झूठ ज्यादा समय तक टिक नहीं सकता” और जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी। उनका दावा है कि जिन आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है, वे मनगढ़ंत हैं और जांच के दौरान वास्तविकता स्पष्ट हो जाएगी।

फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले ने कानूनी और धार्मिक दोनों ही हलकों में चर्चा तेज कर दी है। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मामले की दिशा तय हो सकती है।

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