लखनऊ में आयकर विभाग द्वारा बसपा विधायक उमाशंकर के ठिकानों पर की गई छापेमारी ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में हलचल मचा दी है। यह कार्रवाई देर रात तक जारी रही और इसमें बड़ी संख्या में अधिकारियों को लगाया गया। विभाग की टीम ने एक साथ 30 से ज्यादा स्थानों पर जांच कर कई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण जुटाए।
सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान करीब 3 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए हैं। इसके अलावा कई ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं जो कथित तौर पर अवैध खनन और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क की ओर संकेत करते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि खनन से जुड़े कार्यों में कई निजी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, जिनके माध्यम से धन का निवेश और लेन-देन किया गया।
विशेष रूप से सोनभद्र और मिर्जापुर क्षेत्रों में खनन से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड को जांच का मुख्य आधार माना जा रहा है। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर कुछ अधिकारियों और उनके बीच हुए आर्थिक लेन-देन का उल्लेख भी पाया गया है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और मजबूत हुई है।
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सीएजी की पूर्व रिपोर्ट में भी अवैध खनन के कारण सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होने की बात सामने आई थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई शुरू की गई मानी जा रही है। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि अवैध कमाई को कहां और किस प्रकार निवेश किया गया।
यह कार्रवाई भविष्य में अवैध खनन और टैक्स चोरी के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत भी मानी जा रही है। फिलहाल आयकर विभाग पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।