उत्तराखंड सरकार ने चार धाम यात्रा की ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन के लिए निर्धारित शुल्क देना होगा। यह कदम मुख्य रूप से फर्जी रजिस्ट्रेशन और अनावश्यक स्लॉट ब्लॉकिंग को रोकने के लिए उठाया गया है।
गढ़वाल प्रशासन के मुताबिक, न्यूनतम 10 रुपये शुल्क का सुझाव सामने आया है। अंतिम निर्णय के लिए एक विशेष कमेटी बनाई गई है, जो रिपोर्ट सौंपने के बाद सरकार को सिफारिश करेगी। सरकार की स्वीकृति के बाद शुल्क की आधिकारिक घोषणा होगी।
चार धाम यात्रा में शामिल चार प्रमुख तीर्थ—Yamunotri Temple, Gangotri Temple, Kedarnath Temple और Badrinath Temple—हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित हैं। ये मंदिर वर्ष में लगभग छह महीने ही खुले रहते हैं। मौसम अनुकूल होने पर कपाट खुलते हैं और सर्दियों में बंद कर दिए जाते हैं।
यात्रा को घड़ी की दिशा में पूरा करना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। श्रद्धालु पहले यमुनोत्री में देवी यमुना के दर्शन करते हैं, फिर गंगोत्री में मां गंगा के, उसके बाद केदारनाथ में भगवान शिव और अंत में बद्रीनाथ में भगवान विष्णु के दर्शन कर यात्रा पूर्ण करते हैं।
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प्रशासन का कहना है कि शुल्क बहुत कम रखा जाएगा ताकि किसी भी श्रद्धालु पर आर्थिक बोझ न पड़े। इसके बदले उन्हें बेहतर भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शी बुकिंग प्रणाली का लाभ मिलेगा। डिजिटल रजिस्ट्रेशन से सरकार को यात्रियों का सटीक डेटा भी मिलेगा, जिससे आपातकालीन स्थितियों में मदद पहुंचाना आसान होगा।
चार धाम यात्रा आध्यात्मिक रूप से जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण भी है। कठिन रास्तों और मौसम की अनिश्चितता के बीच सुव्यवस्थित प्रबंधन बेहद जरूरी है। ऐसे में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुल्क का यह कदम यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।