- राहुल गांधी पर अप्रत्यक्ष निशाना, केरल सरकार की तारीफ के बाद फिर बढ़ी पार्टी के भीतर विवाद की चर्चा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के एक ताजा बयान ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। मीडिया से बातचीत के दौरान अय्यर ने कहा कि वे खुद को गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी मानते हैं, लेकिन “राहुलवादी” नहीं हैं। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, पर सीधे राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अय्यर ने कहा, “मैं गांधीवादी हूं, नेहरूवादी हूं, राजीववादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं हूं।” उन्होंने बातचीत के दौरान डॉ. अंबेडकर की जीवनी ‘ए पार्ट बट अपार्ट’ का जिक्र करते हुए संकेत दिया कि विचारधारात्मक स्वतंत्रता उनके राजनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस पार्टी पहले से ही कई मुद्दों को लेकर आंतरिक बहसों का सामना कर रही है।
दरअसल, यह पहला मौका नहीं है जब मणिशंकर अय्यर के बयान ने पार्टी में असहज स्थिति पैदा की हो। हाल ही में उन्होंने केरल में सत्तारूढ़ वामपंथी गठबंधन सरकार और मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के कामकाज की खुलकर तारीफ की थी। एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘विजन 2031: इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डेमोक्रेसी एंड डेवलपमेंट’ में उन्होंने यहां तक कहा था कि वे विजयन को दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और केरल को देश का सर्वश्रेष्ठ पंचायती राज मॉडल बनाने की अपील की।
अय्यर के इस बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने खुद को उनसे अलग करते हुए स्पष्ट किया कि यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं और पार्टी की आधिकारिक राय नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले ऐसे बयान कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं।
कांग्रेस पहले ही राज्य में वाम मोर्चे से सीधी राजनीतिक लड़ाई लड़ती रही है, ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा प्रतिद्वंद्वी सरकार की प्रशंसा और अब राहुल गांधी पर टिप्पणी को संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व को लेकर नई बहस के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस बयान पर क्या रुख अपनाता है और इसका चुनावी राजनीति पर कितना असर पड़ता है।