उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने विधानसभा में कहा कि राज्य अब “इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट” नीति पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में प्रदेश ने प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और सुरक्षा के जरिए निवेश का भरोसेमंद माहौल तैयार किया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, एमएसएमई सेक्टर ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है। 96 लाख से अधिक इकाइयां सक्रिय हैं और करोड़ों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले उद्योग लगाने में अनावश्यक बाधाएं थीं, लेकिन अब 1000 दिनों तक एनओसी की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।
प्रदेश सरकार ने ‘सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड’ यानी ट्रिपल एस मॉडल अपनाया है। कानून-व्यवस्था में सुधार, नीति में स्थिरता और कार्यान्वयन में तेजी ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। डीरिग्युलेशन और डिक्रिमिनलाइजेशन के तहत कई पुराने आपराधिक प्रावधान हटाए गए हैं, जिससे उद्योगों पर अनावश्यक दबाव कम हुआ है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेश प्रस्ताव अब केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग और उत्पादन के चरण तक पहुंच रहे हैं। 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू पर काम शुरू हो चुका है। इससे लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
बजट सत्र में गूंजा रोजगार का सवाल, सदन में हंगामा और तीखे आरोप – Sindhu Times
रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट जोन’ योजना प्रस्तावित की गई है, जो जिला स्तर पर स्किल डेवलपमेंट से लेकर प्लेसमेंट तक की व्यवस्था करेगी। आउटसोर्सिंग में पारदर्शिता लाने के लिए विशेष कॉर्पोरेशन का गठन किया गया है, ताकि युवाओं को उचित मानदेय मिल सके।
आज उत्तर प्रदेश स्टार्टअप और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का उभरता केंद्र है। मोबाइल निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के साथ-साथ आईटी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की पहल के तहत जल्द ही सेमीकंडक्टर फैब यूनिट की शुरुआत प्रदेश में नई औद्योगिक क्रांति का संकेत होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो प्रदेश कभी पलायन के लिए जाना जाता था, वह अब अवसरों की भूमि बन चुका है। युवा अब बाहर नहीं, बल्कि अपने ही राज्य में रोजगार और सम्मानजनक भविष्य देख रहे हैं।