असम के मुख्यमंत्री हिमन्त बिस्वा सरमा और कांग्रेस के बीच चल रहा टकराव अब और उग्र हो गया है। ‘अवैध भूमि’ के आरोपों को लेकर कांग्रेस पर मानहानि का मुकदमा दायर करने के बाद सीएम सरमा ने खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि या तो कांग्रेस अदालत में उनकी कथित 12,000 बीघा जमीन का पूरा ब्योरा पेश करे, या फिर 500 करोड़ रुपये का हर्जाना चुकाने के लिए तैयार रहे।
मुख्यमंत्री का कहना है कि वर्षों से उनके खिलाफ बिना प्रमाण आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे न केवल उनकी छवि बल्कि संवैधानिक पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचती है। उन्होंने इसे राजनीति नहीं बल्कि कानून का विषय बताया।
‘बेबुनियाद आरोपों की राजनीति बंद करे कांग्रेस’
सीएम हिमन्त ने कहा कि अगर कांग्रेस के पास उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत है, तो वह उसे सार्वजनिक करे। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए अफवाहें फैला रहा है। सरमा ने यह भी कहा कि अदालत में सच सामने आ जाएगा कि आरोप तथ्यात्मक हैं या सिर्फ चुनावी हथकंडा।
गौरव गोगोई के पाकिस्तान दौरे पर सवाल
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के 2013 के पाकिस्तान दौरे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गोगोई ने खुद स्वीकार किया है कि वह बिना वीज़ा के रावलपिंडी गए थे। सरमा के मुताबिक, बिना वीज़ा किसी दूसरे देश में प्रवेश करना सामान्य प्रक्रिया नहीं है और यह गंभीर सवाल खड़े करता है।
सीएम ने दावा किया कि अगर गोगोई बिना वीज़ा पाकिस्तान गए थे, तो उन्हें वहां किसी सरकारी एजेंसी की मदद मिली होगी। उन्होंने इस बयान को “खुद कबूलनामा” बताते हुए कहा कि यह कानूनी रूप से महत्वपूर्ण सबूत है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पाकिस्तान यात्रा पूरी तरह वैध थी और आवश्यक अनुमतियों के साथ की गई थी। गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि सीएम हिमन्त मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बार-बार पुराने मामलों को उछाल रहे हैं।
आगे क्या?
यह विवाद अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। एक ओर मानहानि का मुकदमा है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे से जुड़े आरोप। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह टकराव आने वाले समय में असम की राजनीति को और गर्म कर सकता है।