राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा में उस समय असाधारण स्थिति पैदा हो गई, जब नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र करते हुए भारत-चीन सीमा का मुद्दा उठाया। यह मुद्दा उठते ही सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया और बहस नियमों से हटती नजर आई।
राहुल गांधी ने कहा कि चीन की सेना भारतीय सीमा में घुसपैठ कर रही है और इसका जिक्र पूर्व सेना प्रमुख ने अपनी किताब में किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रही है। उनके इस बयान को लेकर सत्तापक्ष ने कड़ा विरोध जताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है, वह अभी सार्वजनिक ही नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना प्रकाशित पुस्तक के आधार पर संसद में आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बिना ठोस प्रमाण के बयान देना गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि अगर उनके पास तथ्य हैं तो उन्हें सबूतों के साथ सामने रखना चाहिए।
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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बार-बार हस्तक्षेप करते हुए सदन को नियमों के तहत चलाने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में भारत-चीन संबंधों का कोई उल्लेख नहीं है, इसलिए चर्चा का दायरा उसी विषय तक सीमित रहना चाहिए।
स्पीकर ने नियम 353 का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाने से पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। उन्होंने राहुल गांधी से अपेक्षा जताई कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते वे संसदीय मर्यादाओं का पालन करें।
राहुल गांधी ने जवाब में कहा कि सरकार बार-बार विपक्ष की देशभक्ति पर सवाल उठाती है, जबकि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि उनकी चिंता देश की सुरक्षा और सरकार की जवाबदेही को लेकर है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने भी हस्तक्षेप किया और कहा कि विपक्ष नियमों को तोड़कर जानबूझकर माहौल खराब कर रहा है। उन्होंने कहा कि सदन को चर्चा का मंच बनाना चाहिए, न कि आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा।
अंततः लगातार हंगामे और नोकझोंक के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित कर दी गई।