NCERT की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में शामिल न्यायपालिका से संबंधित अध्याय को लेकर उठे विवाद के बाद अब मामले ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्र सरकार ने इस अध्याय को फिर से लिखने और उसकी समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की है।
इस बारे में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी, जिसके बाद अदालत ने इस मामले में अपनी कार्यवाही समाप्त कर दी। यह निर्णय तब लिया गया जब यह सुनिश्चित किया गया कि भविष्य में ऐसी सामग्री को प्रकाशित करने से पहले विशेषज्ञों की जांच की जाएगी।
विवाद की जड़ वह अध्याय था, जिसमें न्यायपालिका की कार्यप्रणाली के साथ-साथ उसमें कथित भ्रष्टाचार का भी जिक्र किया गया था। इस पर कई सामाजिक और कानूनी संगठनों ने आपत्ति जताई थी। मामला इतना बढ़ गया कि सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
इसके बाद NCERT ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विवादित अध्याय को वापस ले लिया और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। परिषद ने यह भी कहा कि वह भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराएगी और पाठ्यपुस्तकों की सामग्री को अधिक जिम्मेदारी के साथ तैयार किया जाएगा।
नई गठित समिति में के.के. वेणुगोपाल, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस अनिरुद्ध बोस जैसे वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नया अध्याय तथ्यात्मक, संतुलित और छात्रों के लिए उपयुक्त हो।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया था कि संशोधित पाठ को बिना विशेषज्ञों की मंजूरी के प्रकाशित नहीं किया जाएगा। इसी के तहत यह समिति गठित की गई है।
यह कदम शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि छात्रों को सही और निष्पक्ष जानकारी मिले।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से शिक्षा के क्षेत्र में विश्वास बढ़ेगा और भविष्य में विवादों से बचा जा सकेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नया अध्याय किस रूप में सामने आता है और वह छात्रों को न्यायपालिका के बारे में क्या संदेश देता है।