साल 2026 की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल ‘बॉर्डर 2’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। 28 साल पहले आई सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ के सीक्वल से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन फिल्म उन उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाती। कमजोर स्क्रिप्ट, दोहराए गए डायलॉग और लंबा रनटाइम इसकी सबसे बड़ी कमजोरियां बनकर सामने आती हैं। हालांकि, सनी देओल की दमदार मौजूदगी फिल्म में जान जरूर फूंकती है।
भावनाओं से शुरू होती है कहानी
फिल्म की कहानी तीन दोस्तों—निर्मलजीत सिंह सिखों (दिलजीत दोसांझ), मेजर होशियार सिंह दहिया (वरुण धवन) और लेफ्टिनेंट कमांडर जोसेफ नरोन्हा (अहान शेट्टी)—के इर्द-गिर्द घूमती है। ये तीनों 1969 में नेशनल वॉर अकादमी में ट्रेनिंग लेते हैं और वहीं उनकी दोस्ती मजबूत होती है।
कहानी का पहला हिस्सा इनके परिवार, रिश्तों और सैनिकों के त्याग पर फोकस करता है। मां का बलिदान, पत्नी का गर्व और देश के लिए समर्पण जैसे भावनात्मक पहलू दर्शकों को प्रभावित करते हैं। यह हिस्सा काफी हद तक पहली ‘बॉर्डर’ की याद दिलाता है।
सेकेंड हाफ में भटक जाती है फिल्म
फिल्म का सेकेंड हाफ भारत-पाकिस्तान युद्ध पर केंद्रित है, जहां कहानी कमजोर पड़ने लगती है। पाकिस्तान की साजिश, भारतीय सेना का जवाब और युद्ध के दृश्य भले ही भव्य दिखते हैं, लेकिन उनमें नयापन नहीं है।
कई सीन और डायलॉग पुराने वॉर ड्रामा फिल्मों की याद दिलाते हैं। कुछ दृश्य ऐसे भी हैं, जो कहानी के प्रवाह को तोड़ देते हैं और अविश्वसनीय लगते हैं। खासतौर पर सनी देओल के बेटे से जुड़ा ट्रैक भावनात्मक होने के बावजूद सही ढंग से विकसित नहीं हो पाता।
एक्टिंग में सनी देओल सबसे आगे
अभिनय की बात करें तो सनी देओल एक बार फिर अपनी पुरानी स्टाइल में नजर आते हैं। उनकी आवाज, डायलॉग डिलीवरी और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।
वरुण धवन का प्रदर्शन औसत रहा है
दिलजीत दोसांझ इस बार खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए
अहान शेट्टी अपने किरदार को ठीक-ठाक निभाते हैं
परमवीर चीमा कई दृश्यों में भावनात्मक असर छोड़ते हैं
मोना सिंह बेटे की शहादत वाले सीन में दिल छू जाती हैं
सोनम बाजवा का रोल छोटा है, लेकिन वह अपने हिस्से के साथ न्याय करती हैं।
म्यूजिक और डायरेक्शन कमजोर कड़ी
फिल्म का संगीत ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाता। केवल एक गाना ही दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो पाया है। बाकी गाने कहानी को आगे बढ़ाने में नाकाम रहते हैं।
सबसे बड़ी कमजोरी फिल्म का निर्देशन है। कई जगह कहानी बिखरती हुई नजर आती है और 3 घंटे 17 मिनट का रनटाइम फिल्म को और भारी बना देता है।
फिल्म की अच्छी बातें
पहले हाफ की भावनात्मक कहानी
वॉर सीन्स की भव्यता
सनी देओल की दमदार मौजूदगी
कुछ देशभक्ति से भरे दृश्य
हालांकि, विज्ञापनों के साथ फिल्म देखने में करीब 4 घंटे लग जाते हैं, जो दर्शकों के लिए थकाऊ हो सकता है।
फाइनल वर्डिक्ट
‘बॉर्डर 2’ भावनाओं और देशभक्ति से भरपूर फिल्म बनने की कोशिश करती है, लेकिन कमजोर कहानी और रिपीटेड ट्रीटमेंट इसकी रफ्तार रोक देते हैं। अगर आप सनी देओल के फैन हैं या वॉर ड्रामा पसंद करते हैं, तो एक बार देख सकते हैं। बाकी दर्शकों के लिए यह फिल्म औसत अनुभव साबित हो सकती है।
⭐ रेटिंग: 2.5/5